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दुमका में न्यायिक हिरासत में बंदी की संदिग्ध मौत परिवार का संगीन आरोप—“पुलिस ने पीट-पीटकर मार डाला, RIMS रेफर सिर्फ नाटक”

📰 दुमका में न्यायिक हिरासत में बंदी की संदिग्ध मौत
परिवार का संगीन आरोप—“पुलिस ने पीट-पीटकर मार डाला, RIMS रेफर सिर्फ नाटक”

दुमका में एक बार फिर पुलिस-प्रशासन कठघरे में है। हंसडीहा थाना क्षेत्र में एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध मौत ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि कस्टोडी में बेरहमी से पिटाई के बाद उसकी मौत हुई, और इसे छुपाने के लिए अस्पताल रेफर का पूरा “ड्रामे वाला” खेल खेला गया।


🚨 गिरफ्तारी से मौत तक… हर कदम पर सवाल ही सवाल

नोनीहाट पंचायत के मोहबन्ना निवासी मोहम्मद अबजल शेख (34) को पुलिस ने 29 नवंबर को SC/ST एक्ट के एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया।
1 दिसंबर को कोर्ट में पेशी हुई और दुमका के केंद्रीय कारा में भेज दिया गया।

लेकिन 2 दिसंबर को जो हुआ, उसने पूरे मामले को मानवाधिकार उल्लंघन की तरफ मोड़ दिया।


⚕️ जेल प्रशासन का पत्र और अस्पताल की हड़बड़ाहट

2 दिसंबर को परिवार को चिट्ठी भेजी गई कि अबजल की तबीयत खराब है और उसे PJMCH, दुमका में भर्ती किया गया है।

परिजन अस्पताल पहुँचे—तो अबजल की हालत पहले ही अत्यंत गंभीर थी।
डॉक्टरों ने रांची RIMS रेफर किया…
और रांची पहुँचते ही उसे मृत घोषित कर दिया गया

परिवार का दावा—
▶️ “दुमका में ही उसकी मौत हो चुकी थी। रेफर का पूरा खेल सिर्फ मामले को दबाने के लिए था।”


🔥 परिजनों के चौंकाने वाले आरोप

1️⃣ निजी गाड़ी में उठाया गया, रास्ते में पिटाई

अबजल के पिता असलम शेख का गंभीर आरोप:

“पुलिस सादे कपड़ों में प्राइवेट गाड़ी से आई थी, और गाड़ी में बैठाते समय ही उसे पीट रही थी।”

2️⃣ जबरन दस्तखत करवाने का पुराना पैटर्न

परिजनों ने बताया कि पुलिस पहले भी बिना बताये कागज़ों पर जबरन साइन करवाती थी।

3️⃣ मौत के बाद रेफर — ‘स्क्रिप्टेड प्लान’

सबसे बड़ा सवाल—
अगर हालत गंभीर थी तो समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई?
क्या मौत पहले ही हो चुकी थी जिसे छुपाया जा रहा है?

4️⃣ परिजनों को सूचना देने में संदिग्ध देरी

परिवार का सवाल—

“अगर सुबह भर्ती कराया था, तो शाम तक हमें क्यों नहीं बताया गया?”


👨‍👩‍👧‍👦 पीछे छूट गया परिवार… जिम्मेदारी कौन लेगा?

अबजल अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गया।
परिवार का रो-रोकर आरोप—“यह सीधा कस्टोडियल मर्डर है।”

लेकिन दुमका पुलिस-प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।


क्या होगी निष्पक्ष न्यायिक जांच? या फाइलों में दफ्न हो जाएगा मामला?

दुमका में पहले भी न्यायिक हिरासत में मौत और पुलिस ज्यादती के कई मामले आए, जो बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिए गए।
अब देखने वाली बात यह है—

✔️ क्या इस बार होगी कड़ी न्यायिक जांच?

✔️ क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?

✔️ या यह मौत भी एक और ‘आंकड़ा’ बनकर रह जाएगी?


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