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अदानी पावर प्लांट: मुआवज़ा, पुनर्वास और भ्रम पर प्रशासन का सख्त रुख

डीएम बोले—एक भी जायज़ किसान नहीं रहेगा वंचित

रिपोर्ट: खुर्रम शब्बार

भागलपुर।
अदानी पावर प्लांट से जुड़े वर्षों पुराने विवादों और लंबित मामलों को सुलझाने की दिशा में जिला प्रशासन ने ठोस पहल शुरू कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने पीरपैंती प्रखंड कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट कर दिया कि मुआवज़ा, पुनर्वास और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

बैठक में अदानी पावर प्लांट के वरिष्ठ अधिकारी, भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार और जिला भू-अर्जन अधिकारी राजेश कुमार मौजूद रहे। समीक्षा के केंद्र में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसान, आदिवासी समुदाय और सामाजिक संगठनों की शिकायतें रहीं।

किसानों की आवाज़ सीधे डीएम तक

समीक्षा बैठक के बाद जिलाधिकारी ने किसान चेतना एवं उत्थान समिति के अध्यक्ष श्रवण सिंह से मुलाकात कर किसानों की समस्याएं सुनीं। डीएम ने निर्देश दिया कि प्रभावित किसान संपूर्ण दस्तावेज़ के साथ सीधे उनके भागलपुर कार्यालय में उपस्थित हों, ताकि मामलों का शीघ्र निष्पादन हो सके।

कब्रिस्तान और आदिवासी पुनर्वास पर संवेदनशील रुख

हरिनकोल पंचायत के वार्ड सदस्य रिज़्जू पहाड़िया ने अपने पूर्वजों के कब्रिस्तान के लिए वैकल्पिक भूमि की मांग रखी। इस पर डीएम ने इसे सामाजिक और भावनात्मक रूप से संवेदनशील मामला बताते हुए सम्मानजनक समाधान का आश्वासन दिया।
डीएम ने साफ कहा कि पहाड़िया जनजाति का पुनर्वास प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उन्हें पूरे सम्मान के साथ बसाया जाएगा।

तीन बड़ी समस्याएं, तीन स्पष्ट समाधान

मीडिया से बातचीत में डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि प्रशासन के सामने मुख्य रूप से तीन प्रकार की समस्याएं सामने आई हैं—

  1. पारिवारिक विवाद वाले मामले
    जिन किसानों के मुआवज़ा मामले एलए कोर्ट में पारिवारिक विवाद के कारण लंबित हैं, यदि वे आपसी सहमति से आवेदन देते हैं तो कोर्ट से विवाद समाप्त कर मुआवज़ा भुगतान कराया जाएगा।
  2. मृतक खातेदारों के आश्रितों का मुआवज़ा
    जिन किसानों के नाम से पंचाट बना था और जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके आश्रितों को 50 लाख रुपये से अधिक मुआवज़ा मिलना है। ऐसे मामलों में राशि सीमा बढ़ाने के लिए सरकार से पत्राचार किया गया है।
  3. फसल नुकसान को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम
    डीएम ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण वर्ष 2013 में ही पूर्ण हो चुका है। इसके बावजूद फसल नुकसान को लेकर किसानों को गुमराह किया जा रहा है। ऐसे तत्वों पर प्रशासन की कड़ी नजर है।

जनप्रतिनिधियों से भी लिया फीडबैक

बैठक के दौरान जदयू जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता और बीस सूत्री अध्यक्ष हरेराम शर्मा से भी डीएम ने मुलाकात कर जनप्रतिनिधियों की राय जानी।

संदेश साफ

जिलाधिकारी ने दो टूक कहा—

“एक भी वास्तविक किसान या आदिवासी परिवार वंचित नहीं रहेगा। लेकिन भ्रम फैलाने वालों पर सख्ती तय है।”

प्रशासन की इस सक्रियता से वर्षों से लंबित अदानी पावर प्लांट से जुड़े मामलों के समाधान की उम्मीद एक बार फिर जगी है।

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