रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी के निदेशक सहित अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे राज्य में यह सवाल उठने लगा है कि CID की अगली कार्रवाई किस पर होगी?

क्या है पूरा मामला?

14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने मेरिट सूची, मूल्यांकन प्रक्रिया और परीक्षा संचालन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों के विरोध के बीच राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी।

 

CID ने पहले JPSC कार्यालय, परीक्षा शाखा और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के दौरान कंप्यूटर, सर्वर, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच भी शुरू की गई है।

गिरफ्तार कौन-कौन?

CID ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता

परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी का निदेशक

एजेंसी और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी

जांच एजेंसी का कहना है कि गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

चेयरमैन का इस्तीफा बना बड़ा संकेत

CID की कार्रवाई के बीच JPSC के अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि इस्तीफे और जांच के बीच आधिकारिक रूप से कोई संबंध नहीं बताया गया है, लेकिन घटनाक्रम ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी पर सबसे बड़ा सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि जिस एजेंसी को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, उसके खिलाफ पहले भी सवाल उठ चुके थे। विपक्ष और अभ्यर्थियों का आरोप है कि ब्लैकलिस्टेड या विवादित एजेंसी को दोबारा जिम्मेदारी देना पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। यही जांच का प्रमुख बिंदु बन गया है।

अब CID के निशाने पर कौन?

सूत्रों के अनुसार जांच अब केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं है। CID निम्न बिंदुओं पर फोकस कर रही है:

परीक्षा संचालन की स्वीकृति देने वाले अधिकारी।

एजेंसी चयन प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार पदाधिकारी।

परिणाम तैयार करने और मेरिट सूची जारी करने में शामिल अधिकारी।

डिजिटल डेटा में किसी तरह की छेड़छाड़ या लॉगिन एक्सेस रखने वाले तकनीकी कर्मचारी।

वित्तीय लेन-देन और संभावित मिलीभगत की जांच।

हालांकि CID ने अभी तक किसी अन्य अधिकारी या व्यक्ति का नाम सार्वजनिक रूप से आरोपी के रूप में घोषित नहीं किया है, इसलिए आगे किसकी गिरफ्तारी होगी, इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

मुख्य परीक्षा स्थगित

बढ़ते विवाद और जांच को देखते हुए JPSC ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा भी स्थगित कर दी है। आयोग का कहना है कि निष्पक्ष जांच पूरी होने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।

राजनीतिक घमासान तेज

JPSC विवाद को लेकर राज्यभर में विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्र संगठनों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दल परीक्षा रद्द करने, नई परीक्षा कराने और पूरी प्रक्रिया की न्यायिक या स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

JPSC परीक्षा विवाद अब केवल परीक्षा अनियमितता का मामला नहीं रह गया है, बल्कि झारखंड की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बन चुका है। उप परीक्षा नियंत्रक और एजेंसी निदेशक की गिरफ्तारी के बाद जांच निर्णायक चरण में पहुंच गई है। आने वाले दिनों में डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, पूछताछ और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर CID की कार्रवाई और व्यापक हो सकती है। फिलहाल अगला निशाना कौन होगा, इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

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