- DGP तदाशा मिश्रा का सख्त संदेश: SC/ST अत्याचार के मामलों में अब नहीं चलेगी ढिलाई, गिरफ्तारी से लेकर मुआवजा तक की हुई हाई लेवल समीक्षा
रांची। झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज लंबित मामलों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में राज्यभर के लंबित कांडों की प्रगति, आरोपियों की गिरफ्तारी, लंबित वारंटों के निष्पादन, इश्तेहार एवं कुर्की की कार्रवाई, पीड़ितों को मुआवजा एवं पुनर्वास, फास्ट ट्रैक एवं स्पीडी ट्रायल, दोषसिद्धि (Conviction) की स्थिति तथा झूठे मामलों (False Cases) की समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान DGP तदाशा मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन मामलों में आरोपी अब तक फरार हैं, उनकी शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। यदि आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं तो उनके विरुद्ध वारंट, इश्तेहार और कुर्की की कार्रवाई में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा और पुनर्वास सहायता समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें न्याय के साथ-साथ आवश्यक सहयोग भी मिल सके।
DGP ने यह भी कहा कि गंभीर मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और फास्ट ट्रैक एवं स्पीडी ट्रायल के माध्यम से मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अभियोजन पक्ष और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया, ताकि दोषियों को सजा दिलाने की दर (Conviction Rate) बढ़ाई जा सके।
बैठक में झूठे मामलों की भी समीक्षा की गई। DGP ने निर्देश दिया कि हर मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यों के आधार पर जांच की जाए, ताकि निर्दोष व्यक्ति अनावश्यक कार्रवाई का शिकार न हों और वास्तविक पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
बैठक के अंत में DGP तदाशा मिश्रा ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा करें तथा प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक विलंब को गंभीरता से लिया जाएगा।
