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कहलगांव विधानसभा में अल्पसंख्यक वोट बनेगे निर्णायक, तेजस्वी यादव के दौरे के बाद महागठबंधन को मिल रहा बड़ा लाभ

📰 कहलगांव विधानसभा में अल्पसंख्यक वोट बनेगे निर्णायक, तेजस्वी यादव के दौरे के बाद महागठबंधन को मिल रहा बड़ा लाभ

 

भागलपुर / कहलगांव से रिपोर्ट

दिनांक: 10 नवंबर 2025

🔸  (Highlights):

 

  • अल्पसंख्यक, दलित, पिछड़े और गरीब वोटर बनेगे चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर
  • एआईएमआईएम और जनस्वराज्य पार्टी पर अल्पसंख्यक समुदाय का भरोसा घटा
  • तेजस्वी यादव के कहलगांव दौरे से महागठबंधन को मिला नया जोश
  • बीजेपी में टिकट वितरण को लेकर बढ़ी नाराज़गी
  • पवन कुमार यादव निर्दलीय मैदान में, एनडीए में मची हलचल

🗳️ वोटरों का मूड बदला, झांसे में नहीं आ रहे अल्पसंख्यक

 

भागलपुर जिले की कहलगांव विधानसभा सीट पर इस बार अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के वोटर निर्णायक भूमिका में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन वर्गों के मतदाता अब पहले की तरह भावनाओं में नहीं बह रहे हैं, बल्कि समझदारी से फैसला लेने की ओर बढ़े हैं।

अल्पसंख्यक मतदाता अब एआईएमआईएम और जनस्वराज्य पार्टी जैसी पार्टियों को बीजेपी की “बी टीम” मानने लगे हैं। उनका कहना है कि ये पार्टियां सिर्फ वोट काटने की राजनीति कर रही हैं, ताकि असली विपक्ष कमजोर हो सके।

तेजस्वी यादव के कहलगांव दौरे से महागठबंधन में जोश

8 नवंबर को तेजस्वी यादव ने कहलगांव में विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि अब वक्त है बिहार को बाँटने की राजनीति को जवाब देने का।

तेजस्वी के भाषण के बाद इलाके में महागठबंधन समर्थकों में जबरदस्त ऊर्जा देखने को मिल रही है।

सूत्रों के अनुसार, अब दलित, पिछड़े, गरीब और अल्पसंख्यक वर्ग एकजुट होकर राजद प्रत्याशी रजनीश भारती के समर्थन में खड़े दिख रहे हैं।

🔹 बीजेपी में नाराज़गी, पवन यादव निर्दलीय मैदान में

 

पिछली बार कहलगांव सीट से बीजेपी के पवन कुमार यादव विधायक बने थे, लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।

यह सीट जदयू के खाते में चली गई, जिससे स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है।

नतीजतन, पवन यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया है। इससे एनडीए की अंदरूनी चुनौती और बढ़ गई है।

🔸 एनडीए में हड़कंप, महागठबंधन को मिल सकता है फायदा

 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तेजस्वी यादव के कहलगांव दौरे के बाद एनडीए खेमे में बेचैनी बढ़ गई है।

महागठबंधन को एकजुटता का फायदा मिल सकता है, खासकर तब जब अल्पसंख्यक और पिछड़े मतदाता अब बिखरने के बजाय संगठित होकर वोट करने की सोच बना चुके हैं।

 

 

 

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