शाहीन खान
गोड्डा। नगर निकाय चुनाव की मतगणना समाप्त होते ही जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे शहर को चौंका दिया। परिणाम ने जहां एक ओर नए नगर अध्यक्ष का चेहरा दिया, वहीं दूसरी ओर कई राजनीतिक सवाल भी खड़े कर दिए।
मतगणना पूरी होने से पहले ही निवर्तमान अध्यक्ष ने हार स्वीकार करते हुए मैदान छोड़ दिया था। उनका अनुमान था कि हार का अंतर हजार से डेढ़ हजार वोटों के बीच होगा, लेकिन अंतिम नतीजा बिल्कुल अलग निकला। जीत-हार का फैसला महज 251 वोटों से हुआ।
सुशील रमानी ने कुल 5264 वोट हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया और नगर अध्यक्ष का सेहरा उनके सिर बंधा। वहीं कामरान अशरफी ने 5014 वोट लाकर न सिर्फ कड़ी टक्कर दी, बल्कि पूरे गोड्डा को हैरान कर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कामरान अशरफी की हार भी किसी जीत से कम नहीं है। सीमित संसाधनों और बिना बड़े खर्च के उन्होंने अपनी व्यक्तिगत छवि और साफ-सुथरे व्यक्तित्व के दम पर यह मुकाबला रोमांचक बना दिया। महज 251 वोटों का अंतर इस बात का संकेत है कि शहर की एक बड़ी आबादी बदलाव की पक्षधर थी।
दिलचस्प बात यह है कि शहर के चौक-चौराहों पर विजयी प्रत्याशी से अधिक चर्चा कामरान अशरफी की हो रही है। लोग उनकी सादगी, ईमानदारी और साफ छवि की सराहना कर रहे हैं। हालांकि, सुशील रमानी भी मिलनसार और शांत स्वभाव के व्यक्ति माने जाते हैं, जिससे शहर को उनके नेतृत्व से काफी उम्मीदें हैं।
अब गोड्डा की जनता की निगाहें नए नेतृत्व पर टिक गई हैं। विकास, पारदर्शिता और भरोसे की कसौटी पर आने वाले दिनों में नगर प्रशासन को खुद को साबित करना होगा।
251 वोटों का यह अंतर आने वाले समय में गोड्डा की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।















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