दुमका। नगर थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह अपराधियों ने पुलिस व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए डीआईजी कार्यालय के समीप सरेआम फायरिंग कर दी। संताल परगना मोटर मजदूर संघ के प्रमंडलीय अध्यक्ष व प्रभात खबर एजेंट अरुण सिंह को बाइक सवार दो अपराधियों ने उस वक्त गोली मार दी, जब वे गिलानपाड़ा स्थित अपने घर से बस स्टैंड जा रहे थे।
सुबह करीब 6 से 6:15 बजे के बीच बस स्टैंड से महज 50 मीटर पहले अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। एक गोली उनकी पीठ में लगी और आर-पार हो गई। गोली लगते ही वे सड़क पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, जहां से बेहतर इलाज के लिए दुर्गापुर मिशन अस्पताल रेफर कर दिया गया। इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया है।
🔎 सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस, एसपी का दावा—जल्द गिरफ्तारी
घटना की सूचना मिलते ही एसपी पीतांबर सिंह खेरवार, डीएसपी इकुड डुंगडुंग और एसडीपीओ विजय कुमार महतो समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। घटनास्थल से दो जिंदा कारतूस और एक खोखा बरामद किया गया है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। एसपी ने दावा किया है कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी।
⚠️ तीसरी बार जानलेवा हमला
अरुण सिंह पर यह पहला हमला नहीं है।
वर्ष 1999 में बस स्टैंड पर हुए गोलीकांड में वे बाल-बाल बचे थे।
21 अप्रैल 2024 को कोर्ट रोड पर भी उन पर हमला हुआ था, हालांकि उस वक्त हमलावर गोली नहीं चला पाया।
इस बार अपराधियों ने बेहद नजदीक से गोली मारकर वारदात को अंजाम दिया।
लगातार हो रहे हमलों से उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
🚨 हमले के विरोध में उबाल, आंदोलन की चेतावनी
घटना के बाद बस स्टैंड परिसर में मोटर मजदूर संघ, मालिक समिति और दुकानदार समिति की संयुक्त बैठक हुई। संगठनों ने 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी नहीं होने पर उग्र आंदोलन और शहर बंद की चेतावनी दी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
डीआईजी कार्यालय, पुलिस कंट्रोल रूम, कोर्ट और समाहरणालय जैसे संवेदनशील स्थलों के पास दिनदहाड़े फायरिंग ने कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। 12 घंटे बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में आक्रोश है। लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
⏳ रूपम किशोर सिंह हमले में भी कार्रवाई धीमी
शिव सुंदरी रोड निवासी रूपम किशोर सिंह पर हुए हमले के 48 घंटे बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई सुस्त है। इससे शहर में भय और असंतोष का माहौल गहराता जा रहा है।
दुमका में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने आमजन की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अब निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी होगी या फिर जनता को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा?















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