रिपोर्ट : शाहीन खान
गोड्डा।
गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए इस अस्पताल में पहुंचते हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां बुनियादी सुरक्षा इंतज़ाम तक दुरुस्त नहीं हैं। अस्पताल में जीवन रक्षक अग्निशामक यंत्र पिछले तीन महीनों से एक्सपायर पड़े हैं।
गंभीर बात यह है कि इसी अस्पताल में हर सप्ताह चार दिन महिलाओं का बंध्याकरण ऑपरेशन किया जाता है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि किसी भी समय आग लगने जैसी घटना होती है, तो मरीजों के पास न तो बचाव का रास्ता है और न ही कोई वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था।
करोड़ों की योजनाएं, फिर भी सुरक्षा शून्य
पोड़ैयाहाट CHC को मुख्यमंत्री रखरखाव योजना और अस्पताल संचालन योजना के तहत हर साल करोड़ों रुपये मिलते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में न तो फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय है और न ही नियमित निरीक्षण होता है। सवाल उठता है कि जब मरीजों की जान दांव पर है, तो इन योजनाओं का लाभ जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?
शुद्ध पेयजल के नाम पर लापरवाही
अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगी शीतल जल मशीन भी खतरे का कारण बनी हुई है। मशीन में फिल्टर नहीं लगा है और सीधे टंकी का पानी मरीजों को पिलाया जा रहा है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है, जबकि शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है।
नवजात की मौत के बाद भी नहीं सुधरे हालात
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह इसी अस्पताल में नवजात शिशु की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद भी अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
सिविल सर्जन का बयान
इस मामले में गोड्डा के सिविल सर्जन सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया,
> “चिकित्सा प्रभारी को एक्सपायर हो चुके अग्निशामक यंत्र बदल लेने चाहिए थे। इसकी जानकारी हमें नहीं थी। अब पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।”
बड़ा सवाल
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
क्या कागजों में ही सुरक्षित है पोड़ैयाहाट CHC?
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