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125 दिन का जुमला, हक़ छीनने की साज़िश — दीपिका पांडे सिंह का केंद्र पर तीखा हमला

🔴 **मनरेगा पर “विकसित भारत” का वार!

संघीय ढांचे पर चोट, झारखंड के गरीब मजदूरों को धकेलने की तैयारी

विकसित भारत’ के नाम पर गरीबों से विश्वासघात!

रांची। केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत–गारंटी’ योजना के तहत मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों को लेकर झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। रांची में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने केंद्र पर सीधा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि 100 दिन की वैधानिक रोजगार गारंटी को 125 दिन करने का शोर दरअसल गरीबों की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है।

 

उन्होंने कहा कि श्रम बजट खत्म कर नॉर्मेटिव एलोकेशन लागू करना, मजदूरी दर को केंद्र के नियंत्रण में देना और 60 दिनों का अनिवार्य मोराटोरियम — ये सभी प्रावधान झारखंड जैसे गरीब और आदिवासी बहुल राज्यों की रीढ़ तोड़ने वाले हैं।

 

मंत्री ने दो टूक कहा कि इन फैसलों का सीधा असर भूमिहीन मजदूरों, आदिवासियों और ग्रामीण गरीबों पर पड़ेगा। इससे पलायन बढ़ेगा, भुखमरी की स्थिति बनेगी और कृषि-बागवानी योजनाएं ठप होंगी।

 

दीपिका पांडे सिंह ने सवाल उठाया कि जब राज्य पहले से संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, तब 40 प्रतिशत वित्तीय भार राज्यों पर डालना और बायोमेट्रिक अटेंडेंस थोपना कैसे न्यायसंगत है। उन्होंने इसे राज्यों को कमजोर करने की रणनीति करार दिया।

 

मंत्री ने कहा कि राज्यों से बिना सहमति ऐसे फैसले लागू करना संघीय ढांचे पर सीधा हमला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार की नीतियों का हर मोर्चे पर विरोध करेगी।

 

 

 

 

 

 

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