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क्रिश्चियन स्कूलों से भाजपा नेताओं के बच्चों का नाम काटा जाए” — मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के बयान से झारखंड की राजनीति में तूफान

शिक्षा के राजनीतिकरण को लेकर मंत्री के बयान पर भाजपा का कड़ा पलटवार, जिला अध्यक्ष ने बताया ‘मानसिक दिवालियापन’

 

रांची/झारखंड।

झारखंड की सियासत में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब राज्य के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विवादित बयान देते हुए कहा कि क्रिश्चियन स्कूलों में पढ़ने वाले भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बच्चों का नाम स्कूल के प्रिंसिपल और डायरेक्टर को काट देना चाहिए।

मंत्री डॉ. अंसारी ने आरोप लगाया कि भाजपा शिक्षा का राजनीतिकरण कर रही है और क्रिश्चियन शिक्षण संस्थानों को बदनाम करने की साजिश में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा सार्वजनिक मंचों से क्रिश्चियन संस्थानों पर सवाल उठाती है, तो उनके नेताओं का बच्चों को उन्हीं स्कूलों में पढ़ाना दोहरी नीति को दर्शाता है।

मंत्री के इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

भाजपा जिला अध्यक्ष का पलटवार

 

मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष सुमित शरण ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा,

 

> “बच्चों को राजनीति से जोड़कर देखना मंत्री की मानसिक दिवालियापन की निशानी है। स्कूलों का उद्देश्य शिक्षा देना है, न कि राजनीतिक पहचान के आधार पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करना।”

सुमित शरण ने मंत्री के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताते हुए कहा कि भाजपा ऐसे किसी भी विचार का विरोध करती है जो शिक्षा को राजनीति का हथियार बनाए। उन्होंने मंत्री से सार्वजनिक रूप से बयान वापस लेने की मांग की।

मंत्री ने बयान को ठहराया सही

विवाद बढ़ने के बाद मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अपने बयान को उचित ठहराते हुए कहा कि

 

> “जैसे देश में शिक्षा संस्थान निष्पक्ष नीति अपनाने की बात करते हैं, वैसे ही झारखंड में भी यह सुनिश्चित होना चाहिए कि शिक्षा में राजनीति की घुसपैठ न हो।”

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की दोहरी राजनीति का असर बच्चों की पढ़ाई और माहौल पर पड़ता है, इसलिए क्रिश्चियन स्कूलों को ऐसी राजनीति से खुद को दूर रखना चाहिए।

राजनीतिक तापमान चढ़ा

मंत्री के इस बयान ने झारखंड की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर जहां विपक्ष इसे बच्चों और शिक्षा के भविष्य से जोड़कर देख रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे भाजपा की कथित दोहरी नीति के खिलाफ सख्त संदेश बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

 

 

 

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