“मुद्दों पर बहस नहीं, गाली-गलौज की राजनीति? डॉ. इरफान अंसारी पर टिप्पणी के बाद भाजपा की भाषा पर सवाल”
रिपोर्ट: शाहीन खान
रांची।
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के खिलाफ कथित रूप से की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस मामले में युथ कांग्रेस झारखंड के प्रदेश महासचिव आरिफ रजा द्वारा रांची के इटकी थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 24 दिसंबर 2025 को एक स्थानीय न्यूज़ चैनल पर प्रसारित एक कार्यक्रम के दौरान निशा भगत ने मंत्री के खिलाफ अमर्यादित, अपमानजनक और असंसदीय भाषा का प्रयोग किया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि डॉ. इरफान अंसारी एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं, जो लगातार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में लगे हुए हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की भाषा न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि जनता द्वारा चुने गए मंत्री की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास भी है।
कानूनी कार्रवाई की मांग
आरिफ रजा ने अपने आवेदन में इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 504 (जानबूझकर अपमान) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के अंतर्गत दंडनीय अपराध बताते हुए मामले की गंभीर जांच और FIR दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने पुलिस को सभी आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध कराने और जांच में पूरा सहयोग देने की बात भी कही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पूर्व भी निशा भगत द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के खिलाफ इसी तरह की कथित आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया जा चुका है, जिसे एक निरंतर और सोची-समझी प्रवृत्ति के रूप में देखा जा रहा है।
अमर्यादित बयानों की राजनीति पर सवाल
इस पूरे प्रकरण के बाद एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस तरह के बयान क्यों दिए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा से जुड़े नेताओं और समर्थकों द्वारा शीर्ष नेतृत्व से लेकर स्थानीय स्तर तक जिस प्रकार सड़क-स्तरीय और अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश?
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि विकास, स्वास्थ्य व्यवस्था, बेरोज़गारी और महंगाई जैसे अहम मुद्दों पर जवाब देने के बजाय जानबूझकर विवादित और व्यक्तिगत बयान देकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या भाजपा इस तरह की भाषा को अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बना चुकी है।
संयम और मर्यादा की मांग
प्रबुद्ध वर्ग और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले में सभी राजनीतिक दलों से संयम बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध मर्यादा, तर्क और तथ्यों के दायरे में रहकर होना चाहिए, न कि अपमानजनक भाषा और व्यक्तिगत हमलों के जरिए।















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