“झारखंड में ग्राम सभा को मिला निर्णायक अधिकार—पेसा नियमावली से आदिवासी स्वशासन को नई ताकत: प्रेमनंदन मंडल”
गोड्डा। झारखंड में पेसा एक्ट की नियमावली को राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के गोड्डा जिला अध्यक्ष प्रेमनंदन मंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का स्वागत करते हुए इसे आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय बताया।
प्रेमनंदन मंडल ने कहा कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में लंबे समय से पेसा एक्ट की नियमावली लागू होने का इंतज़ार था। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन हेमंत सोरेन सरकार ने इसे पूरा कर ग्राम सभा को उसका वास्तविक संवैधानिक अधिकार सौंपा है।
उन्होंने कहा कि नियमावली लागू होने के बाद ग्राम सभा केंद्र में होगी और जल, जंगल, जमीन, स्थानीय संसाधन, विकास योजनाएं, विस्थापन और खनन जैसे मामलों में अंतिम निर्णय ग्राम सभा का होगा। इससे ग्राम सभा और ग्राम पंचायत दोनों को मजबूती मिलेगी और गांवों में लोकतंत्र जड़ों तक मजबूत होगा।
झामुमो के गोड्डा जिला अध्यक्ष ने कहा कि यह फैसला दिशोम गुरु शिबू सोरेन की सोच और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की भावना को साकार करने वाला है। इससे आदिवासी समाज को सम्मान, आत्मनिर्भरता और स्वशासन का वास्तविक अधिकार मिलेगा।
झारखंड में पेसा एक्ट क्या है?
- पेसा एक्ट झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार देता है।
- यह आदिवासी समाज की परंपरागत व्यवस्था, सामाजिक संरचना और नेतृत्व को कानूनी मान्यता देता है।
पेसा नियमावली से झारखंड को क्या लाभ होंगे?
- जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय अधिकार मजबूत होंगे
- भूमि अधिग्रहण और विस्थापन में ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होगी
- बाहरी हस्तक्षेप पर रोक लगेगी
- गांवों में स्वशासन, सम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा
अंत में प्रेमनंदन मंडल ने कहा कि पेसा नियमावली का लागू होना झारखंड के आदिवासी समाज के लिए नए अधिकारों और नए आत्मविश्वास की शुरुआत है और यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत नींव साबित होगा।















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