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लंबे इंतज़ार का अंत—झारखंड सरकार ने रचा इतिहास, PESA नियमावली से साकार हुआ गांधी का ग्राम स्वराज: प्रदीप यादव”

  • जल-जंगल-जमीन पर जनता का राज! PESA नियमावली लागू होते ही बदलेगा झारखंड का पावर स्ट्रक्चर”

रिपोर्ट: शाहीन खान

रांची। पेसा एक्ट की नियमावली को राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने पर पोड़ैयाहाट विधायक एवं झारखंड विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का जोरदार स्वागत करते हुए इसे झारखंड के आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय बताया। उन्होंने सरकार को बधाई देते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

प्रदीप यादव ने कहा कि पेसा एक्ट का मूल उद्देश्य ग्राम सभा को सशक्त बनाना और आदिवासी समाज को उनके पारंपरिक अधिकार लौटाना है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा,
“पेसा एक्ट 1996 में कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किया गया था। उस समय मैं वर्ष 2001 में झारखंड में ग्रामीण विकास मंत्री था और हमने इस कानून को झारखंड की पंचायती राज व्यवस्था के साथ समाहित करने का कार्य किया था।”

उन्होंने बताया कि उसी प्रयास का परिणाम रहा कि मुखिया, प्रमुख, जिला परिषद और ग्राम प्रधान जैसे पदों में आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित हुई तथा ग्राम सभा के अध्यक्ष के रूप में महतो, मुंडा जैसे पारंपरिक आदिवासी नेतृत्व को अधिकार मिले।

प्रदीप यादव ने कहा कि दुर्भाग्यवश पेसा एक्ट की नियमावली लंबे समय तक लंबित रही। इस दौरान भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों ने इसे लागू करने में कोई ठोस पहल नहीं की। उन्होंने कहा,
“जो काम वर्षों तक नहीं हो सका, उसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने कर दिखाया। यह झारखंड के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है।”

उन्होंने विश्वास जताया कि नियमावली लागू होने के बाद ग्राम सभा केंद्र में होगी और जल, जंगल, जमीन, खनन, विस्थापन एवं विकास योजनाओं से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की भूमिका निर्णायक होगी। इससे ग्राम सभा और ग्राम पंचायत दोनों को वास्तविक मजबूती मिलेगी तथा आदिवासी समाज को सम्मान और आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी।

प्रदीप यादव ने कहा कि यह निर्णय महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन मजबूत होगा और लोकतंत्र जड़ों तक पहुंचेगा।

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अंत में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा, राजद सहित गठबंधन सरकार के सभी नेताओं को इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए बधाई देते हुए कहा कि पेसा नियमावली झारखंड में आदिवासी अधिकारों की बहाली और सामाजिक न्याय की नई इबारत लिखेगी।


 

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