धरमपुर में कचरा प्रबंधन प्लांट पर बढ़ा विवाद, रैयतों व ग्रामीणों का तीखा विरोध
स्थल चयन को लेकर वार्ता विफल, प्रशासनिक दखल की मांग तेज
बासुकीनाथ/निज संवाददाता। नगर पंचायत बासुकीनाथ के धरमपुर में प्रस्तावित कचरा प्रबंधन प्लांट को लेकर विवाद गहरा गया है। धर्मपुर मौजा के 16 आना रैयतों के साथ ठेचका घोघा पंचायत के आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्लांट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रस्तावित स्थल को लेकर शनिवार को अंचलाधिकारी जरमुंडी की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक विरोध की भेंट चढ़ गई। पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी और वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई।
ग्रामीणों और रैयतों का आरोप है कि नगर पंचायत बासुकीनाथ ग्रामीण इलाके को कचरा डंपिंग ज़ोन के रूप में उपयोग कर क्षेत्र में भूमि, वायु और जल प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। ठेचका घोघा पंचायत की मुखिया उर्वशी हसदा ने कहा कि आबादी से सटे इलाके में कचरा प्रबंधन केंद्र स्थापित करना ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ है। “ग्रामवासियों की न तो राय ली गई और न ही वैज्ञानिक मानकों का पालन हुआ,” उन्होंने आरोप लगाया।
मौजा धर्मपुर की 5 एकड़ भूमि पर निर्माण से पहले ही विवाद
जानकारी के अनुसार, जरमुंडी अंचल के धर्मपुर मौजा, थाना नंबर 16, खाता संख्या 38, दाग संख्या 4 की 5 एकड़ परती कदीम भूमि नगर विकास एवं आवास विभाग को कचरा प्रबंधन प्लांट निर्माण हेतु हस्तांतरित की गई है। परंतु भूमि चयन को लेकर शुरू हुआ विरोध अब तीव्र रूप धारण कर चुका है।
एनएससी केंद्र दोबारा चालू करने पर भड़के ग्रामीण
रविवार को धरमपुर, केरजूरी और चरखरा गांवों के दर्जनों ग्रामीण धरमपुर में हुई बैठक के दौरान विरोध जताने पहुंच गए। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी एनएससी केंद्र के खिलाफ लिखित शिकायत दी गई थी, जिसके बाद केंद्र को अस्थायी रूप से बंद किया गया था। लेकिन पुनः बिना ग्रामीणों की सहमति के इसे चालू कर दिया गया, जिससे नाराज़गी और बढ़ गई।
ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ता के साथ अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि यदि केंद्र को तुरंत बंद नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन के लिए वे बाध्य होंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार, आबादी के बीच कचरे का निस्तारण गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष खतरा मंडरा रहा है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की प्रतीक्षा
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उचित दूरदृष्टि, वैज्ञानिक अध्ययन और जनसमर्थन के बिना कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
विरोध स्थल पर लेके मुर्मू, गणेश मुर्मू, महाकाल मुर्मू, महादेव मुर्मू, गयान मुर्मू, नुनु लाल मुर्मू समेत कई ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों के बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।















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