49.85 किमी लंबे एनएच-133 कॉरिडोर में टनल और तीन रेलवे क्रॉसिंग, लंबित कार्यों को जल्द पूरा कराने में जुटा प्रशासन
रिपोर्ट:- शाहिन खान
गोड्डा। गोड्डा और संताल परगना की कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली मिर्जाचौकी-महागामा फोरलेन परियोजना को लेकर झारखंड सरकार के स्तर से भी प्रशासनिक समन्वय और लंबित कार्यों को गति देने पर जोर दिया जा रहा है। एनएच-133 के इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन ने भूमि, तकनीकी समन्वय, संरचनाओं के स्थानांतरण सहित विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों की समीक्षा तेज कर दी है।
शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त लोकेश मिश्रा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में परियोजना की प्रगति और लंबित मामलों की बिंदुवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों एवं कार्यदायी एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ लंबित प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया।
49.85 किलोमीटर का होगा फोरलेन कॉरिडोर
मिर्जाचौकी-महागामा फोरलेन परियोजना की कुल लंबाई 49.850 किलोमीटर निर्धारित है। इसमें 42.500 किलोमीटर ग्रीनफील्ड और 7.350 किलोमीटर ब्राउनफील्ड कॉरिडोर शामिल है।
परियोजना में करीब 300 मीटर लंबी टनल के साथ तीन रेलवे क्रॉसिंग का भी प्रावधान है। ऐसे में यह परियोजना गोड्डा की सड़क कनेक्टिविटी के साथ-साथ क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
झारखंड सरकार की प्राथमिकता में समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई
परियोजना से जुड़े विभिन्न विभागों के लंबित कार्यों को जल्द पूरा कराने पर प्रशासन का विशेष फोकस है। बैठक में सड़क निर्माण के रास्ते में आने वाली विभिन्न संरचनाओं एवं सेवाओं के स्थानांतरण और समायोजन की स्थिति की जानकारी ली गई।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि भूमि से संबंधित कार्रवाई, आवश्यक अनुमतियां, तकनीकी सहयोग और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि मुख्य निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी न हो।
गोड्डा की कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आधार
मिर्जाचौकी-महागामा फोरलेन के पूरा होने के बाद गोड्डा समेत आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। इससे व्यापार, माल परिवहन, आवागमन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बेहतर आधार मिल सकता है।
झारखंड सरकार और जिला प्रशासन की ओर से परियोजना से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी और विभागीय समन्वय पर जोर दिए जाने से अब इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
बैठक में अपर समाहर्ता इन्दर कुमार सहित भवन प्रमंडल, आरईओ एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी मौजूद थे।
