45% ब्याज, फोन पर लोन, ग्रुप लोन के नाम पर गांव-गांव गुंडागर्दी, इज्जत के डर से चुप हैं कर्जदार
गोड्डा।
देश में जिस रफ्तार से फाइनेंस कंपनियां और डिजिटल लोन ऐप्स बढ़ी हैं, उसने आम जनता को राहत देने के बजाय उन्हें कर्ज के ऐसे जाल में फंसा दिया है, जिससे निकल पाना मुश्किल होता जा रहा है। गोड्डा जिले में इसका असर सबसे ज्यादा गरीब और मध्यम वर्ग पर दिखाई दे रहा है।
स्थिति यह है कि जिस देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी आज भी 5 किलो सरकारी राशन पाने के लिए लाइन में लगने को मजबूर है, उसी जनता को मोबाइल फोन पर बार-बार कॉल कर, मैसेज भेजकर और ऐप के जरिए 10 हजार, 20 हजार, 50 हजार से लेकर लाखों रुपये तक का ऑनलाइन कर्ज ऑफर किया जा रहा है। बेरोजगारी, महंगाई और कम आमदनी से जूझ रही जनता मजबूरी में यह कर्ज ले लेती है और अनजाने में डेट ट्रैप में फंसती चली जाती है।
45 प्रतिशत तक ब्याज, फिर शुरू होती है रिकवरी की दबंगई
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई NBFC और डिजिटल लोन कंपनियां ब्याज के नाम पर 40 से 45 प्रतिशत तक वसूली कर रही हैं। जब कर्जदार समय पर EMI नहीं चुका पाते, तो उसी बैंक या NBFC के तथाकथित रिकवरी एजेंट उनके घर पहुंचकर गाली-गलौज, धमकी और मानसिक उत्पीड़न पर उतर आते हैं।
गोड्डा शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां रिकवरी एजेंट घर के बाहर हंगामा करते हैं, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के सामने कर्जदार को अपमानित करते हैं, जिससे उसकी सामाजिक इज्जत को गहरी ठेस पहुंचती है।
इज्जत बचाने के लिए शिकायत नहीं करते लोग
सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि जानकारी के अभाव और बदनामी के डर से अधिकांश कर्जदार रिकवरी एजेंटों की शिकायत ही नहीं करते। लोगों के मन में यह गलत धारणा बैठा दी गई है कि लोन लेना और उसे न चुका पाना कोई जुर्म है, जबकि कानून में ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसी डर का फायदा उठाकर रिकवरी एजेंट खुलेआम दबाव और धमकी का सहारा लेते हैं।
गांव-गांव में ग्रुप लोन के नाम पर आतंक
गोड्डा जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों तक ग्रुप लोन के नाम पर लोगों को कर्ज दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समूह का कोई एक सदस्य भी पैसा नहीं दे पाता, तो रिकवरी एजेंट पूरे समूह पर दबाव बनाते हैं, गांव पहुंचकर गाली-गलौज और गुंडागर्दी शुरू कर देते हैं। इससे गांवों में डर और तनाव का माहौल बन रहा है।
कानून क्या कहता है
कानून विशेषज्ञों के अनुसार Reserve Bank of India (RBI) के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि कोई भी बैंक या NBFC का रिकवरी एजेंट:
गाली-गलौज या धमकी नहीं दे सकता
जबरन घर में घुसकर पैसे या सामान नहीं ले सकता
सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद कॉल या विज़िट नहीं कर सकता
पड़ोसियों, रिश्तेदारों या कार्यस्थल पर बदनाम नहीं कर सकता
पुलिस या कोर्ट का डर दिखाकर वसूली नहीं कर सकता
बिना काग़ज़ के रिकवरी पूरी तरह अवैध
रिकवरी एजेंट के पास बैंक या NBFC का लिखित प्राधिकरण पत्र, वैध पहचान पत्र और संबंधित लोन का पूरा विवरण होना अनिवार्य है। इन दस्तावेजों के बिना की गई कोई भी रिकवरी कानूनन अवैध मानी जाती है।
लोन न चुकाना जुर्म नहीं, गुंडागर्दी जुर्म है
विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि लोन न चुका पाना कोई आपराधिक अपराध नहीं है, लेकिन रिकवरी के नाम पर धमकी, बदनामी, मारपीट या जबरन वसूली करना सीधा अपराध है। ऐसे मामलों में पीड़ित 112 पर कॉल कर सकता है, थाने में FIR दर्ज करा सकता है और बैंक व RBI में शिकायत कर सकता है।
जागरूकता और सख्त कार्रवाई की जरूरत
गोड्डा जिले में जिस तरह कर्ज, ऊंचे ब्याज और रिकवरी एजेंटों की दबंगई बढ़ रही है, उसे देखते हुए अब प्रशासनिक सख्ती और जन-जागरूकता अभियान की सख्त जरूरत है, ताकि लोग अपने अधिकार समझें और डर के बजाय कानून का सहारा लें।
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