“भाजपा के 18 साल के ठहराव को तोड़कर हेमंत सोरेन ने किया इतिहास—PESA एक्ट से ग्राम सभा बनी सत्ता का केंद्र”
Edit: शाहीन खान
गोड्डा। झारखंड में आदिवासी स्वशासन और ग्राम लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट से पेसा एक्ट को मंजूरी दिलाकर उन्होंने न केवल वर्षों से लंबित मांग को पूरा किया, बल्कि ग्राम सभा को वास्तविक शक्ति सौंपने का काम किया है। इस निर्णय को झारखंड मुक्ति मोर्चा के गोड्डा जिला अध्यक्ष प्रेम नंदन कुमार ने ऐतिहासिक और सराहनीय बताया है।
प्रेम नंदन कुमार ने कहा कि पेसा कानून ग्राम सभाओं को अधिकार देने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन झारखंड राज्य गठन के बाद लंबे समय तक यह कानून राज्य में लागू नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के 18 वर्षों के शासनकाल में इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। इतना ही नहीं, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेसा एक्ट को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की, तो भाजपा नेताओं ने इसमें लगातार अवरोध उत्पन्न करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि तमाम बाधाओं के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनमानस के सुझावों और आदिवासी समाज की भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए पेसा एक्ट को कैबिनेट से मंजूरी दिलाई। इससे झारखंड में आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को नई ताकत मिली है और ग्राम सभा को केंद्र में रखकर शासन की नींव मजबूत हुई है।
झामुमो जिला अध्यक्ष के अनुसार पेसा एक्ट लागू होने से अब जल, जंगल, जमीन, खनन और खनिज संसाधनों पर ग्राम सभा का अधिकार सुनिश्चित होगा। गांव अपनी आवश्यकता के अनुसार छोटी-छोटी विकास योजनाएं स्वयं बना सकेंगे। साथ ही सामाजिक विवादों और छोटे मामलों का निपटारा गांव स्तर पर होने से न्यायालयों और पुलिस प्रशासन पर बोझ भी कम होगा।
उन्होंने कहा कि यह फैसला आदिवासी समाज के अधिकारों, स्वशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाला है। पेसा एक्ट झारखंड में न केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम बनेगा, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
झारखंड में पेसा एक्ट की कैबिनेट से मंजूरी को राजनीतिक और सामाजिक हलकों में ग्राम स्वराज की ओर निर्णायक कदम माना जा रहा है।















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