कन्नौज। उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने की चर्चाओं के बीच कन्नौज जिले से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। छिबरामऊ स्थित 100 शय्या सरकारी अस्पताल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला का ऑपरेशन ऐसे व्यक्ति से कराया जाता दिख रहा है, जिसके पास डॉक्टर होने की कोई मान्यता या डिग्री नहीं है।
वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में अफरा-तफरी मच गई है, वहीं आम लोगों में गुस्सा और भय दोनों साफ नजर आ रहे हैं।
बिना सर्जन, नियमों के बिना ऑपरेशन
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ऑन ड्यूटी एनेस्थेटिक्स डॉक्टर विपिन सचान की मौजूदगी में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। महिला मरीज का पथरी का ऑपरेशन बिना किसी अधिकृत सर्जन के कराया जा रहा है।
इतना ही नहीं, मरीज को बेहोश करने की प्रक्रिया भी किसी विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा नहीं, बल्कि एक जीएनएम (नर्स) द्वारा की जाती दिख रही है। ऑपरेशन थिएटर में मौजूद स्टाफ द्वारा बनाए गए वीडियो में ड्यूटी पर तैनात नर्स इस पूरी प्रक्रिया का विरोध करती भी सुनाई दे रही है, लेकिन इसके बावजूद ऑपरेशन जारी रहता है।
सरकारी अस्पताल में बाहरी हाथ, मरीजों की जान खतरे में
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति का निजी अस्पताल पहले ही बंद हो चुका है, इसके बाद उसने सरकारी अस्पताल में अपनी पैठ बना ली। आरोप यह भी है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पहले भी कई बार बाहरी और अयोग्य लोगों से ऑपरेशन कराए गए, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया।
अब जब खुद अस्पताल कर्मचारियों द्वारा बनाया गया वीडियो सामने आया है, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी है।
जांच के आदेश, कार्रवाई का भरोसा
मामले के तूल पकड़ने के बाद कन्नौज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. स्वदेश गुप्ता ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए दो वरिष्ठ डॉक्टरों की समिति गठित की गई है।
सीएमओ ने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलते ही दोषी डॉक्टर और अवैध रूप से ऑपरेशन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बुलडोजर जमीन पर चला, अस्पताल में नहीं
प्रदेश में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई को लेकर सरकार की सख्ती के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब सरकारी अस्पतालों में फर्जी डॉक्टर खुलेआम ऑपरेशन कर रहे हों, तब मरीजों की सुरक्षा का बुलडोजर आखिर कब चलेगा?
कन्नौज की यह घटना बताती है कि असली खतरा दीवारों से नहीं, बल्कि उन हाथों से है, जिनके भरोसे मरीज अपनी जान सौंप देते हैं।














Leave a Reply