राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर गोड्डा में पत्रकारों को किया गया सम्मानित
गोड्डा, 16 नवंबर:
राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस के अवसर पर एक्सप्रेस न्यूज़ गोड्डा की ओर से माही प्लेस हॉल में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जहाँ गोड्डा जिले के सभी पत्रकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिले भर से पत्रकार मौजूद रहे और कई वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने विचार व्यक्त किए।
वरिष्ठ पत्रकार अभय पालीवाल का संबोधन
इंडियन पंच के ब्यूरो चीफ अभय पालीवाल ने कहा कि आज की पत्रकारिता पहले की तुलना में आसान हो चुकी है।
उन्होंने बताया:“10–20 साल पहले लेख छापने पर कई बार कार्रवाई तक हो जाती थी, पर आज ऐसा कम होता है।”
उन्होंने पत्रकारिता में निष्पक्षता को सबसे बड़ा धर्म बताया।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रेस कॉन्फ्रेंस न होने से सवाल पूछने की परंपरा कमजोर हुई है।
पालीवाल ने पूर्व प्रधानमंत्री और आज के प्रधानमंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस की तुलना करते हुए कहा कि पहले साल में 3–4 प्रेस कॉन्फ्रेंस हो जाती थी, जबकि आज 11 साल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई।
उन्होंने याद दिलाया कि उनके लेखों ने कई बार राष्ट्रीय मुद्दा बनाया, जिनमें घटियारी बलात्कार कांड प्रमुख उदाहरण रहा।
रंजीत राठौर (ETV) का वक्तव्य
रंजीत राठौर ने कहा कि
प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं।
आज के युवा पत्रकार कई मामलों में अनुभवी पत्रकारों से बेहतर काम कर रहे हैं।
वर्तमान समय में पत्रकारिता पहले के मुकाबले आसान हो चुकी है।
नरेंद्र गांधी का वक्तव्य
नरेंद्र गांधी ने कहा कि पत्रकारों को सम्मान न मिलने का कारण खुद पत्रकारों का असंगठित होना है।
उन्होंने कहा कि—
“हम पत्रकार खुद अपने लिए सम्मान की लड़ाई नहीं लड़ते।”
आवश्यकता है कि प्रशासन पर दबाव बनाया जाए और जरूरत पड़े तो बहिष्कार किया जाए।
दीपक (बिहार-झारखंड न्यूज़)
दीपक ने कहा:
“खुशी तब मिलती है जब किसी न्यूज़ पर कार्रवाई होती है।”
उन्होंने इसे पत्रकारिता का असली संतोष बताया।
“मैं हूं गोड्डा” के ब्यूरो का वक्तव्य
उन्होंने कहा:
“आज मीडिया के कई लोग राजनीतिक शक्तियों की गोद में बैठे हैं, जिसे गोदी मीडिया कहा जाता है।”
बड़ी संस्थाएँ भी पत्रकारों को मुसीबत में साथ नहीं देतीं।
पत्रकारों को अपना अस्तित्व बनाने की जरूरत है—जैसे रविश कुमार, अभिसार शर्मा, पुण्य प्रसून बाजपेयी, अजीत अंजुम जैसे पत्रकारों ने किया है।
उन्होंने माना कि निष्पक्ष पत्रकारिता दोनों पक्षों से नुकसान करवा सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार शाहीन खान का वक्तव्य
वरिष्ठ पत्रकार शाहीन खान ने राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस का महत्व समझाते हुए बताया:
16 नवंबर 1966 को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की स्थापना हुई थी, इसी वजह से यह दिवस मनाया जाता है।
यह दिन स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार प्रेस का प्रतीक है।
उन्होंने भारतीय पत्रकारिता का इतिहास भी बताया—
भारत का पहला अखबार “हिकीज़ बंगाल गजट” 29 जनवरी 1780 में शुरू हुआ।
इसके जनक जेम्स अगस्टस हिक्की थे।
इसके बाद इंडिया गजट और 1789 में मुंबई हेराल्ड जैसे अखबार आए।
उन्होंने बताया कि—
पहले की पत्रकारिता बेहद जोखिमभरी और कठिन थी।
आज की पत्रकारिता प्रोफेशनल और आसान हो चुकी है।
अखबारों पर अब विज्ञापन का दबाव बढ़ गया है, जिससे निष्पक्षता पर असर पड़ता है।
उन्होंने कहा—
“निष्पक्ष और भयमुक्त पत्रकारिता ही पत्रकारिता धर्म का पालन करती है।”
एक्सप्रेस न्यूज़ टीम का योगदान
कार्यक्रम का आयोजन एक्सप्रेस न्यूज़ की टीम—
आशुतोष, आनंद, गोविंद, सुमित
तथा अन्य सदस्यों के द्वारा किया गया।
सभी पत्रकारों को सॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों ने एक्सप्रेस न्यूज़ टीम का आभार व्यक्त किया कि वे होली हो या कोई भी विशेष अवसर—हर बार पत्रकारों के सम्मान का कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न सिर्फ सम्मान का अवसर था, बल्कि पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर गंभीर चर्चा का मंच भी बना। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि—
“निष्पक्ष, साहसी और जिम्मेदार पत्रकारिता ही सच्चे लोकतंत्र की रीढ़ है।”
Report_Shahin Khan















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