रिपोर्ट:- शाहीन खान
गोड्डा, । शहर की सांस्कृतिक फिजा उस समय सुरों की मिठास और यादों की भावनाओं से सराबोर हो उठी, जब साज़ म्यूजिकल ग्रुप के तत्वावधान में हिंदी सिनेमा के दो महान सितारों स्वर सम्राट मोहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथि तथा ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी की जयंती के अवसर पर संयुक्त रूप से “एक सुरमई शाम” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के सांस्कृतिक मंच से जुड़े कलाकारों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में संगीत प्रेमियों ने भाग लिया। देर शाम शुरू हुआ यह आयोजन रात तक सुरों की ऐसी महफिल में तब्दील हो गया, जिसमें एक से बढ़कर एक सदाबहार गीतों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान तालियों की गूंज, संगीत की मिठास और महान कलाकारों के प्रति सम्मान का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत मोहम्मद रफ़ी और मीना कुमारी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर तथा दो मिनट का मौन रखकर की गई। उपस्थित सभी लोगों ने स्वर सम्राट मोहम्मद रफ़ी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संगीत की दुनिया में रफ़ी साहब जैसा गायक सदियों में एक बार जन्म लेता है। उनकी आवाज़ केवल एक गायन शैली नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर है। वक्ताओं ने कहा कि उनकी सुरीली, नशीली, जादुई और मखमली आवाज़ आज भी हर उम्र के लोगों के दिलों पर राज करती है। उनके गीत समय के साथ पुराने नहीं हुए, बल्कि हर नई पीढ़ी उन्हें उतनी ही शिद्दत से सुनती और पसंद करती है। उन्होंने कहा कि रफ़ी साहब ने देशभक्ति, भक्ति, प्रेम, ग़ज़ल, कव्वाली और शास्त्रीय संगीत सहित हर विधा में अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया और अपनी आवाज़ से लाखों दिलों में अमिट स्थान बनाया।
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने अभिनेत्री मीना कुमारी को याद करते हुए कहा कि हिंदी सिनेमा में उनकी अदाकारी का कोई दूसरा उदाहरण मिलना कठिन है। उन्हें यूं ही ‘ट्रेजेडी क्वीन’ नहीं कहा जाता था। उन्होंने अपने भावपूर्ण अभिनय और संवाद अदायगी से भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वक्ताओं ने कहा कि उनकी अभिनय शैली आज भी कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। पहले की पीढ़ी से लेकर आज के कलाकार भी उनके अभिनय, भाव-भंगिमा और संवाद शैली का अनुसरण करते हैं। उन्होंने कहा कि मीना कुमारी और मोहम्मद रफ़ी जैसे महान कलाकारों की महानता का वर्णन करने के लिए शब्द भी छोटे पड़ जाते हैं, क्योंकि इन दोनों ने अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति और सिनेमा को अमर बना दिया।
इसके बाद शुरू हुआ सुरों का ऐसा सिलसिला, जिसने पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। साज़ म्यूजिकल ग्रुप के कलाकारों ने मोहम्मद रफ़ी के सदाबहार गीतों को अपनी आवाज़ में प्रस्तुत कर श्रोताओं को पुराने दौर की सुनहरी यादों में पहुंचा दिया। हर प्रस्तुति के बाद दर्शकों की जोरदार तालियों ने कलाकारों का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया। कार्यक्रम में मौजूद संगीत प्रेमी भी कई गीतों को कलाकारों के साथ गुनगुनाते नजर आए। पूरा सभागार संगीत के रंग में रंग गया और ऐसा प्रतीत हुआ मानो रफ़ी साहब स्वयं अपनी मधुर आवाज़ के माध्यम से वहां उपस्थित हों।
इस अवसर पर शहर के जाने-माने कलाकार मधुकर मिश्रा, शाहीन खान, निखिल झा, जावेद, शशि सिन्हा, फैजान और मोहम्मद इस्लाम ने एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुतियां दीं। सभी कलाकारों ने अपने-अपने अंदाज में रफ़ी साहब के लोकप्रिय गीतों को स्वर देकर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति में सुरों की शुद्धता, भावों की गहराई और संगीत के प्रति समर्पण साफ झलक रहा था। कलाकारों की गायकी ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कई बार ऐसा अवसर आया जब पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कवि डॉ. मनोज राही ने अपने विशिष्ट, प्रभावशाली और बेबाक अंदाज में किया। उन्होंने अपने चुटीले अंदाज, साहित्यिक शैली और रोचक प्रस्तुति से पूरे कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। समय-समय पर उन्होंने मोहम्मद रफ़ी और मीना कुमारी के जीवन से जुड़े रोचक प्रसंग भी साझा किए, जिन्हें श्रोताओं ने बड़े ध्यान और उत्साह के साथ सुना। उनके प्रभावी संचालन ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा का संचार किया और उपस्थित लोगों ने उनकी शैली की भरपूर सराहना की।
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। संगीत और कला समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। जब महान कलाकारों की याद में इस प्रकार के आयोजन होते हैं तो नई पीढ़ी को भारतीय सिनेमा और संगीत की गौरवशाली विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि आज के युवा यदि मोहम्मद रफ़ी के गीतों और मीना कुमारी की फिल्मों से प्रेरणा लें, तो वे कला के वास्तविक मूल्यों को समझ सकेंगे।
इस अवसर पर शहर के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। इनमें राजेश झा (पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष), अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सैयद इकरार उल हसन, भारत-भारती पब्लिक स्कूल के निदेशक प्रलय सिंह, परशुन कुमार सहित अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल थे। सभी अतिथियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि साज़ म्यूजिकल ग्रुप लगातार शहर में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का सराहनीय कार्य कर रहा है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है और समाज में कला एवं संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होती है।
श्रोताओं ने भी कार्यक्रम का भरपूर आनंद उठाया। कई लोगों ने कहा कि लंबे समय बाद उन्हें इतनी शानदार संगीतमय संध्या का हिस्सा बनने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किए गए सदाबहार गीतों ने उन्हें पुराने दौर की यादें ताजा करा दीं। पूरा वातावरण संगीत, भावनाओं और सांस्कृतिक गरिमा से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
अंत में आयोजकों ने सभी कलाकारों, अतिथियों, श्रोताओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि शहर की सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक समृद्ध बनाया जा सके। “एक सुरमई शाम” केवल एक संगीत कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारतीय फिल्म जगत के दो महान नक्षत्रों—मोहम्मद रफ़ी और मीना कुमारी—को श्रद्धा, सम्मान और प्रेम से समर्पित एक भावपूर्ण सांस्कृतिक संध्या थी। इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि महान कलाकार कभी विदा नहीं होते, वे अपनी कला, अपने सुर और अपने अभिनय के माध्यम से हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं।
