पश्चिम बंगाल में स्मार्ट बिजली मीटर पर बड़ा फैसला, घरेलू उपभोक्ताओं को मिली राहत

कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए फिलहाल घरों में स्मार्ट बिजली मीटर लगाना अनिवार्य नहीं करने का निर्णय लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी, लेकिन पहले चरण में इसका दायरा सरकारी कार्यालयों, बड़े वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और अघरेलू बिजली उपभोक्ताओं तक सीमित रहेगा।

राज्य सरकार के अनुसार, बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए स्मार्ट मीटर योजना लागू की जा रही है। हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था से फिलहाल बाहर रखा गया है, जिससे लाखों परिवारों को राहत मिली है।

15 हजार करोड़ रुपये के घाटे को कम करने की तैयारी

सरकार का कहना है कि बिजली क्षेत्र में बढ़ते वित्तीय दबाव और वर्षों से चले आ रहे घाटे को कम करने के लिए व्यापक सुधार योजना तैयार की जा रही है। बिजली विभाग पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये के वित्तीय बोझ का अनुमान है। इसके लिए राजस्व संग्रह बढ़ाने, बिजली चोरी रोकने और बकाया राशि की वसूली पर विशेष जोर दिया जाएगा।

प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प

स्मार्ट मीटर योजना के तहत उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड, दोनों में से अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने की छूट मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर लगाने के लिए उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि खर्च नहीं करनी होगी। योजना के क्रियान्वयन में केंद्र सरकार की ओर से भी वित्तीय सहायता मिलने की संभावना है।

800 करोड़ रुपये की बकाया वसूली पर फोकस

बिजली विभाग ने सरकारी संस्थानों और अन्य बड़े बकायेदारों से लगभग 800 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूलने की कार्ययोजना तैयार की है। इसके साथ ही अगले दो महीनों में एक व्यापक “सोर्स एलोकेशन प्लान” तैयार किया जाएगा, जिससे बिजली आपूर्ति और राजस्व प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

बिजली चोरी और लाइन लॉस पर लगेगी लगाम

सरकार का मानना है कि स्मार्ट मीटरिंग से ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन (टी एंड डी) लॉस में कमी आएगी। वर्तमान में राज्य में यह नुकसान करीब 12 प्रतिशत बताया जा रहा है। स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली खपत की निगरानी आसान होगी और अवैध उपयोग तथा चोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

मुख्य बातें

  • घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं।
  • पहले चरण में सरकारी कार्यालयों और कमर्शियल कनेक्शनों में लगेंगे स्मार्ट मीटर।
  • बिजली विभाग के 15 हजार करोड़ रुपये के घाटे को कम करने की तैयारी।
  • उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प उपलब्ध होंगे।
  • 800 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूली के लिए विशेष अभियान।
  • टी एंड डी लॉस को 12 प्रतिशत से घटाकर सिंगल डिजिट में लाने का लक्ष्य।

सरकार के इस फैसले को घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जबकि बिजली क्षेत्र में सुधार और राजस्व बढ़ाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

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