हाई-वोल्टेज ड्रामा: दुमका में शिबू सोरेन के पूर्व सचिव के आवास पर वन विभाग की दबिश, वारंट विवाद और भारी विरोध के बीच खाली हाथ लौटी टीम
विशेष संवाददाता, दुमका
18 जुलाई 2026
18 जुलाई 2026
झारखंड की उपराजधानी दुमका के महुआडंगाल इलाके में शनिवार सुबह उस समय भारी राजनीतिक और प्रशासनिक सरगर्मी बढ़ गई, जब वन विभाग और जिला पुलिस की एक संयुक्त टीम ने अचानक धावा बोल दिया. यह कार्रवाई झामुमो के संस्थापक व पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के पूर्व प्रधान सचिव विवेकानंद राउत उर्फ विवेक राउत के आवास पर की गई. हालांकि, जिस हाई-प्रोफाइल अंदाज में सुबह 8 बजे इस रेड की शुरुआत हुई थी, दोपहर होते-होते वह एक प्रशासनिक गतिरोध और भारी सार्वजनिक विरोध में तब्दील हो गई.
कार्रवाई की असल वजह: अवैध आरा मिल और पुराना वारंट
अब तक सस्पेंस में रही इस छापेमारी की असल वजह का खुलासा करते हुए दुमका के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) सात्विक व्यास ने बताया कि वन विभाग की यह कार्रवाई विवेक राउत पर नहीं, बल्कि उनके भतीजे पंकज राउत को गिरफ्तार करने के लिए की गई थी. पंकज राउत ‘लालजी पटेल एंड कंपनी’ नामक एक सॉ मिल (आरा मिल) के सह-मालिक हैं.
- क्या है मुख्य मामला: पिछले साल 13 जून को वन विभाग की टीम ने आदेश के बावजूद अवैध रूप से चल रही इस आरा मिल का निरीक्षण करने की कोशिश की थी. आरोप है कि उस समय पंकज राउत और उनके सहयोगी जयपाल राउत ने वन अधिकारियों को ऑन-ड्यूटी रोका था और उनके काम में बाधा डाली थी.
- अदालती कार्रवाई: इस मामले में वन विभाग द्वारा चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसके तहत टीम शनिवार को गिरफ्तारी के लिए पहुंची थी.
4 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा और स्थानीय लोगों का आक्रोश
प्रशिक्षु आईएफएस (IFS Trainee) अधिकारी पुष्कर काले के नेतृत्व में जब वन रक्षकों और नगर थाना पुलिस की टीम महुआडंगाल पहुंची, तो उन्हें स्थानीय लोगों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा.
- बिना वारंट तलाशी का आरोप: दुमका जिला परिषद सदस्य चिंता देवी के नेतृत्व में सैकड़ों स्थानीय निवासी और महिलाएं राउत के आवास के मुख्य गेट पर जमा हो गईं. ग्रामीणों का आरोप था कि वन विभाग की टीम के पास घर के अंदर घुसने या तलाशी लेने का कोई पुख्ता सर्च वारंट नहीं था.
- मुख्य गेट को किया जाम: आक्रोशित भीड़ ने मुख्य द्वार को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया. जब अधिकारियों ने घर का ताला तोड़कर अंदर घुसने का प्रयास किया, तो स्थानीय लोगों ने तीखा विरोध करते हुए उन्हें रोक दिया. इस दौरान स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बनी रही.
वार्ता के बाद खुली कुंडी, लेकिन हाथ लगी मायूसी
लगभग 90 मिनट तक चले तीखे विवाद और प्रशासनिक बातचीत के बाद आखिरकार गतिरोध टूटा. आईएफएस अधिकारी पुष्कर काले अपने सुरक्षाकर्मियों और एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ घर के अंदर दाखिल होने में सफल रहे. करीब 10 मिनट तक पूरे परिसर की सघन तलाशी ली गई.
हालांकि, जब पुष्कर काले घर से बाहर निकले, तो उन्हें फिर से भीड़ ने घेर लिया. अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया, “घर के अंदर कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है और न ही आरोपी वहां मौजूद था।”
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
चूंकि विवेक राउत राज्य के सबसे कद्दावर राजनीतिक परिवार (सोरेन परिवार) से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में दुमका विधायक के भी करीबी माने जाते हैं, इसलिए इस छापेमारी को लेकर दुमका के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. आरोपी पंकज राउत के मौके से फरार होने के बाद वन विभाग अब कानूनी विकल्पों और आगे की कुर्की-जब्ती की कार्रवाई पर विचार कर रहा है.
