टूट गई इमारत, लेकिन नहीं टूटेंगी यादें… भागलपुर ने खो दिया अपना ‘दीप प्रभा’

Edit:-शाहीन खान 

भागलपुर की पहचान रहे दीप प्रभा सिनेमा हॉल की इमारत आज ढहाई जा रही है। यह सिर्फ ईंट, पत्थर और सीमेंट का ढांचा नहीं था, बल्कि हजारों परिवारों की हंसी, तालियों की गूंज, सीटी की आवाज़ और अनगिनत यादों का घर था।

एक दौर था, जब नई फिल्म रिलीज़ होते ही दीप प्रभात के टिकट काउंटर पर लंबी-लंबी कतारें लग जाती थीं। लोग घंटों इंतज़ार करते थे, लेकिन चेहरे पर शिकायत नहीं, बल्कि फिल्म देखने की खुशी होती थी। परिवार, दोस्त और रिश्तेदार साथ बैठकर फिल्म देखते थे। इंटरवल में समोसे और कोल्ड ड्रिंक का स्वाद भी उस दौर की यादों का हिस्सा बन जाता था।

समय बदला। मल्टीप्लेक्स आए, लोगों की पसंद बदली और धीरे-धीरे भागलपुर का यह आखिरी सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल भी खामोश हो गया। अब इसकी इमारत भी इतिहास बनने जा रही है।

यह सिर्फ एक भवन का अंत नहीं है, बल्कि भागलपुर के उस दौर का अंत है, जब सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने का माध्यम हुआ करता था।

भागलपुर के पुराने सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों—अजंता टॉकीज, महादेव टॉकीज, शारदा टॉकीज, पिक्चर पैलेस और अब दीप प्रभा—सब एक-एक कर इतिहास बन चुके हैं। कभी जिनके बाहर भीड़ उमड़ती थी, आज वहां सिर्फ खामोशी और यादें बची हैं।

मेरी भी दीप प्रभात से अनगिनत यादें जुड़ी हैं। आज भी याद है, यहां देखी पहली फिल्म “खट्टा मीठा” थी। उसके बाद कई फिल्में यहीं देखीं और आखिरी बार शायद “लापता लेडीज़” या “एनिमल” देखने का मौका मिला। हर बार जब इस सिनेमा हॉल के सामने से गुजरता था, तो टिकट की लाइनें, पोस्टर, भीड़ और लोगों के चेहरों की खुशी एक अलग ही एहसास देती थी। वह अपनापन, वह उत्साह शायद आज के आधुनिक मल्टीप्लेक्स भी नहीं दे पाए।

आज जब दीप प्रभा की दीवारें गिर रही हैं, तो ऐसा महसूस हो रहा है जैसे अपनी ही यादों का एक हिस्सा मलबे में बदलता जा रहा हो।

हो सकता है, आने वाले समय में यहां कोई नई इमारत खड़ी हो जाए, कोई बड़ा कॉम्प्लेक्स बन जाए या कोई आधुनिक भवन तैयार हो जाए। लेकिन उस नई इमारत में बचपन की मासूमियत, परिवार के साथ बिताए वे सुनहरे पल और सिनेमा देखने का वह जादू शायद कभी वापस नहीं लौटेगा।

कुछ जगहें सिर्फ इमारतें नहीं होतीं, वे पूरे शहर की भावनाएं होती हैं। दीप प्रभा सिनेमा हॉल भी ऐसी ही एक धड़कन था, जो अब इतिहास बन रहा है।

अगर आपकी भी दीप प्रभा सिनेमा हॉल से कोई याद जुड़ी है, तो उसे कमेंट में ज़रूर साझा करें। क्योंकि इमारतें टूट जाती हैं, लेकिन उनसे जुड़ी यादें कभी नहीं टूटतीं। 🎬

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