रांची। पूर्व मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने धर्म परिवर्तन और अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे को लेकर चल रही बहस के बीच नया दस्तावेज जारी कर आदिवासी समाज से एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ धर्म परिवर्तन के आधार पर किसी व्यक्ति का एसटी दर्जा समाप्त नहीं किया जा सकता।
शनिवार को जारी चार पृष्ठों के दस्तावेज में तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए दावा किया कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा केवल धर्म परिवर्तन के कारण समाप्त नहीं होता।
बंधु तिर्की ने उन मांगों का भी विरोध किया, जिनमें ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले आदिवासियों को एसटी आरक्षण से बाहर करने या उनके सामाजिक बहिष्कार की बात कही जाती रही है। उनके अनुसार ऐसी मांगें संविधान और सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या के अनुरूप नहीं हैं तथा इससे आदिवासी समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा होगा।
दस्तावेज में भगवान बिरसा मुंडा का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरना और ईसाई आदिवासियों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट रहने की अपील की। साथ ही मीडिया से भी आग्रह किया कि अपुष्ट और समाज में वैमनस्य फैलाने वाली सूचनाओं के प्रसार से बचा जाए।
बंधु तिर्की के इस बयान के बाद झारखंड में धर्म परिवर्तन, एसटी दर्जा और आदिवासी अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
