पटना। नेपाल और उत्तर बिहार में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। कोसी, गंडक, गंगा और बूढ़ी गंडक समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि प्रशासन को वीरपुर स्थित कोसी बराज के 29 फाटक खोलने पड़े हैं और खतरे का संकेत देने के लिए लालबत्ती जला दी गई है।
उधर, वाल्मीकिनगर बराज से 1.36 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। पूर्वी चंपारण के डुमरियाघाट में गंडक नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी है, जिससे आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और गहरा गया है।
सबसे अधिक परेशानी पूर्वी कोसी तटबंध के अंदर रहने वाले लोगों को हो रही है। ढोली, सियानी समेत कई पंचायतों में बाढ़ का पानी घरों और आंगनों तक पहुंच गया है। कई गांवों का सड़क संपर्क टूटने लगा है और ग्रामीण नाव के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं।
वहीं मुंगेर, गोपालपुर और पूर्वी चंपारण के दियारा क्षेत्रों में भी गंगा का पानी तेजी से फैल रहा है। खेत जलमग्न होने लगे हैं और लोगों में दहशत का माहौल है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और सभी जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर हैं। तटबंधों की सुरक्षा के लिए इंजीनियरों और कर्मचारियों की 24 घंटे निगरानी लगाई गई है। संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव दलों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने नदियों के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, अफवाहों से बचने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है।
स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि नेपाल में लगातार हो रही बारिश का असर अगले 24 से 48 घंटे में बिहार के कई और जिलों में देखने को मिल सकता है।
