22 अगस्त तक आवेदन, आधुनिक तकनीक सीखकर स्थानीय बुनकर बढ़ा सकेंगे आय और बाजार में पहचान
रिपोर्ट:- शाहीन खान
गोड्डा, प्रतिनिधि। 12वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के अवसर पर गोड्डा जिले के भगैया में बुनकरों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। तसर क्रय-विक्रय संगठन, भगैया परिसर में स्थापित नए बुनकर प्रशिक्षण केंद्र का शुक्रवार को ऑनलाइन माध्यम से उद्घाटन किया गया। इस केंद्र के माध्यम से स्थानीय बुनकरों को आधुनिक तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उनके कौशल में निखार आएगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
इस अवसर पर झारखंड सरकार की हथकरघा एवं रेशम निदेशक श्रीमती प्रीति रानी (भा.प्र.से.) ने रांची स्थित उद्योग भवन से ऑनलाइन जुड़कर प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ किया। भगैया परिसर में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) गोड्डा के महाप्रबंधक, भारत टेक्स के मार्केटिंग एक्सपर्ट सहित लगभग 60 बुनकर एवं उद्यमियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागी राज्यस्तरीय कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े और स्थानीय आयोजन में उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान उद्यमियों ने कहा कि तसर एवं हथकरघा उत्पादों में मूल्य संवर्धन की अपार संभावनाएँ हैं। यदि बुनकरों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिले तो उनके उत्पादों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे न केवल बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि उन्हें बेहतर मूल्य और अधिक आय भी प्राप्त होगी।
नवस्थापित प्रशिक्षण केंद्र में इच्छुक बुनकरों और उद्यमियों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, आधुनिक बुनाई तकनीक, डिजाइन विकास तथा बाजारोन्मुख उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पारंपरिक हस्तकरघा उद्योग को नई दिशा मिलने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
प्रशिक्षण प्राप्त करने के इच्छुक उद्यमी एवं बुनकर 22 अगस्त 2026 तक अपना आवेदन तसर क्रय-विक्रय संगठन, भगैया कार्यालय में जमा कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया एवं प्रशिक्षण से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थियों से कार्यालय से संपर्क करने की अपील की गई है।
तसर क्रय-विक्रय पदाधिकारी, भगैया-सह-महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी), गोड्डा ने बताया कि यह प्रशिक्षण केंद्र क्षेत्र के बुनकरों के कौशल विकास, उत्पादों की गुणवत्ता सुधार और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे गोड्डा के पारंपरिक तसर एवं हथकरघा उद्योग को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
