घायलों के शरीर पर कथित छर्रों के निशान मिलने के दावों से विवाद गहराया, पुलिस ने आरोपों को किया खारिज; आखिर क्या है पेलेट गन और क्यों है इस पर इतनी बहस?
नई दिल्ली:
दिल्ली में छात्रों के हालिया प्रदर्शन के बाद अब बहस केवल प्रदर्शन या पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि ‘पेलेट गन’ के कथित इस्तेमाल के आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। प्रदर्शन में शामिल कुछ छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आरोप लगाया है कि रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल किया, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हुए।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें घायलों के शरीर पर कथित तौर पर छर्रों जैसे निशान दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्यों बढ़ा विवाद?
इस पूरे विवाद की वजह यह है कि पेलेट गन को दुनिया भर में भीड़ नियंत्रण के सबसे विवादित हथियारों में माना जाता है। अगर किसी प्रदर्शन में इसके इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो मानवाधिकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि आरोप और इनकार के बीच यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या होती है पेलेट गन?
पेलेट गन एक ऐसी बंदूक होती है जो एक साथ दर्जनों छोटे धातु के छर्रे (Pellets) छोड़ती है। इसे आमतौर पर “कम घातक” (Less-Lethal) हथियार माना जाता है, लेकिन करीब से चलाए जाने पर यह गंभीर चोट पहुंचा सकती है। छर्रे आंख, चेहरा और शरीर के संवेदनशील हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं और कई मामलों में स्थायी विकलांगता या दृष्टि खोने तक की घटनाएं सामने आई हैं।
भारत में पहले भी रहा है विवाद
भारत में पेलेट गन सबसे अधिक चर्चा में तब आई थी जब जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों ने इसका इस्तेमाल किया था। उस दौरान बड़ी संख्या में लोगों, विशेषकर युवाओं की आंखों में गंभीर चोटें आई थीं। इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र समेत कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई थी और इसके इस्तेमाल पर पुनर्विचार की मांग की थी।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दिल्ली प्रदर्शन में वास्तव में पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ या नहीं। जब तक किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो उससे पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है।
