1980 और 2011 जैसी बड़ी गिरावट की चर्चा तेज, लेकिन विशेषज्ञों ने निवेशकों को घबराने से किया मना
नई दिल्ली। लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब सोने के बाजार में एक नया तकनीकी संकेत चर्चा का विषय बन गया है। गोल्ड के चार्ट पर ‘डेथ क्रॉस’ बनने से बाजार में यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। कुछ विश्लेषक इसकी तुलना वर्ष 1980 और 2011 में आई ऐतिहासिक गिरावट से कर रहे हैं।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, जब 50-दिवसीय मूविंग एवरेज 200-दिवसीय मूविंग एवरेज के नीचे चला जाता है, तो इसे डेथ क्रॉस कहा जाता है। इसे आमतौर पर बाजार में कमजोरी का संकेत माना जाता है। हालांकि, यह भविष्य की गिरावट की निश्चित भविष्यवाणी नहीं करता।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में सोने की चाल केवल तकनीकी संकेतों से तय नहीं होगी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नीति, डॉलर की मजबूती, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी कीमतों पर बड़ा असर डालेंगे।
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि केवल डेथ क्रॉस देखकर घबराकर सोना बेचने का फैसला न करें। इतिहास बताता है कि कई बार ऐसे संकेत बनने के बाद भी सोने ने मजबूत वापसी की है। इसलिए निवेश से पहले बाजार के सभी संकेतों और आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी है।
निवेशकों के लिए संदेश:
यदि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करना बेहतर हो सकता है। आने वाले दिनों में सोने की चाल पर पूरी दुनिया के निवेशकों की नजर रहेगी।
