रिपोर्ट : विशेष संवाददाता
देश में निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक हर गली-मोहल्ले में नए अस्पताल और क्लीनिक खुल रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हर अस्पताल सरकार से विधिवत पंजीकृत है? क्या वहां इलाज करने वाले डॉक्टर और नर्सें अधिकृत हैं? क्या आयुष्मान भारत योजना का लाभ नियमों के तहत दिया जा रहा है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज शुरू कराने से पहले अस्पताल और डॉक्टर की वैधता की जांच करना उतना ही जरूरी है, जितना सही इलाज कराना। बिना पंजीकरण वाले अस्पताल या अपात्र व्यक्ति से इलाज कराना मरीज की जान के साथ बड़ा जोखिम हो सकता है।
अस्पताल खोलना आसान नहीं, कई कानूनी मंजूरियां जरूरी
भारत में कोई भी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम या क्लीनिक खोलने के लिए कई कानूनी और प्रशासनिक मंजूरियां आवश्यक होती हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
Clinical Establishment Registration (जिला स्वास्थ्य विभाग/संबंधित प्राधिकरण से)
अस्पताल में कार्यरत सभी डॉक्टरों का National Medical Commission (NMC) या संबंधित State Medical Council में वैध पंजीकरण।
नर्सिंग स्टाफ का Indian Nursing Council (INC) या राज्य नर्सिंग परिषद में पंजीकरण।
फायर सेफ्टी NOC और भवन की स्वीकृति।
Bio-Medical Waste Management के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति तथा अधिकृत एजेंसी से अनुबंध।
अस्पताल में मेडिकल स्टोर होने पर Drug License।
अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए PCPNDT Act के तहत पंजीकरण।
एक्स-रे या सीटी स्कैन जैसी रेडियोलॉजी सेवाओं के लिए Atomic Energy Regulatory Board (AERB) की अनुमति।
दुकान एवं स्थापना अधिनियम के तहत पंजीकरण तथा आवश्यक कर संबंधी औपचारिकताएं।
इनमें से किसी भी महत्वपूर्ण अनुमति का अभाव अस्पताल के संचालन पर सवाल खड़े कर सकता है और संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकता है।
आयुष्मान कार्ड से इलाज: हर अस्पताल को नहीं मिलती अनुमति
कई लोगों की यह धारणा है कि कोई भी निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड से इलाज कर सकता है, जबकि ऐसा नहीं है।
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत इलाज करने के लिए अस्पताल को पहले सरकार से Empanelled Hospital के रूप में मंजूरी लेनी होती है। इसके लिए अस्पताल का वैध पंजीकरण, आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं, योग्य डॉक्टर और निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है। दस्तावेजों की जांच और आवश्यक होने पर निरीक्षण के बाद ही अस्पताल को योजना से जोड़ा जाता है।
समय-समय पर विभिन्न राज्यों में आयुष्मान योजना के तहत फर्जी क्लेम, अनियमित बिलिंग, अनावश्यक भर्ती और नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आने के बाद कई अस्पतालों पर कार्रवाई भी की गई है। ऐसे मामलों में संबंधित अस्पताल का पैनल रद्द किया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
इलाज से पहले ऐसे करें जांच
✔ अस्पताल पंजीकृत है या नहीं? केंद्र सरकार के Clinical Establishments Portal पर अस्पताल या क्लीनिक का नाम खोजकर उसकी पंजीकरण स्थिति देखी जा सकती है।
वेबसाइट: https://www.clinicalestablishments.mohfw.gov.in/
✔ डॉक्टर रजिस्टर्ड हैं या नहीं? डॉक्टर का नाम और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबर National Medical Commission (NMC) या संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल के रिकॉर्ड में जांचा जा सकता है।
वेबसाइट: https://www.nmc.org.in/
✔ आयुष्मान योजना के लिए अधिकृत है या नहीं? यह भी जांच लें कि अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार द्वारा अधिकृत (Empanelled) है या नहीं।
गड़बड़ी दिखे तो कहां करें शिकायत?
सिविल सर्जन कार्यालय
मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (CMO)
राज्य स्वास्थ्य विभाग
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (आयुष्मान भारत)
National Health Authority (NHA)
जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
स्वास्थ्य किसी भी परिवार की सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए केवल अस्पताल की इमारत, विज्ञापन या भीड़ देखकर इलाज शुरू न करें। पहले यह सुनिश्चित करें कि अस्पताल विधिवत पंजीकृत है, डॉक्टर अधिकृत हैं और यदि आयुष्मान योजना के तहत इलाज हो रहा है तो अस्पताल सरकार द्वारा अधिकृत सूची में शामिल है। कुछ मिनट की जांच आपकी जान, आपके अधिकार और सरकारी संसाधनों—तीनों की सुरक्षा कर सकती है।
