कोलकाता/नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के हालिया आंदोलन और 26 दिन की भूख हड़ताल के बाद देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बागी सांसद सयानी घोष का बयान चर्चा का विषय बन गया है।
सयानी घोष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है और सोनम वांगचुक के मुद्दों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनके इस बयान को टीएमसी की आधिकारिक लाइन से अलग माना जा रहा है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।
दरअसल, सोनम वांगचुक ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, छात्रों के हितों की रक्षा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। सरकार के साथ बातचीत और कई आश्वासनों के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।
सयानी घोष के बयान के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और विपक्ष की रणनीति पर असर डाल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधार का मुद्दा लगातार चर्चा में है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सयानी घोष के बयान पर टीएमसी नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया क्या होगी। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करते हुए कहा है कि यह आंदोलन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक नई शुरुआत है।
