हिमाचल प्रदेश में “स्मार्ट” मीटर पर संग्राम — बंद खोखे पर ₹82,059 का बिल, बग्गा में उबाल
जवाली (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के जवाली उपमंडल के बग्गा क्षेत्र में स्मार्ट मीटर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दो महीने से बंद पड़े एक खोखे पर ₹82,059 का बिजली बिल आने से स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है। सवाल साफ है—जब दुकान बंद थी और बिजली की खपत नहीं हुई, तो इतना भारी-भरकम बिल कैसे जारी हो गया?
जानकारी के अनुसार पीड़ित उपभोक्ता ने जनवरी माह में मात्र ₹219 का बिल जमा करवाया था। इसके बाद खोखा पूरी तरह बंद रहा। बावजूद इसके हाल ही में जारी बिल में ₹82,059 की राशि दर्शाई गई, जिसने परिवार को सदमे में डाल दिया। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर को पारदर्शिता और सटीक बिलिंग के नाम पर लागू किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।
> “स्मार्ट” व्यवस्था अगर राहत के बजाय दहशत दे, तो ऐसी व्यवस्था को हम नहीं स्वीकार करेंगे।
भले ही विभाग स्मार्ट मीटर के फायदे गिना रहा हो, लेकिन यह आम जनता के लिए मुसीबत का घर बनता जा रहा है।
🔥 हिमाचल में बढ़ता अविश्वास
शून्य खपत के बावजूद भारी बिल — क्या यह तकनीकी खामी है या सिस्टम की गंभीर चूक?
विभाग का स्वतः संज्ञान न लेना — क्या उपभोक्ता खुद लड़ाई लड़े तभी कार्रवाई होगी?
डिजिटल डेटा की पारदर्शिता पर सवाल — उपभोक्ता को वास्तविक रीडिंग और खपत का स्पष्ट ब्यौरा क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और बिजली विभाग से निष्पक्ष तकनीकी जांच, बिल निरस्तीकरण और उपभोक्ता को तत्काल राहत देने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो क्षेत्र में विरोध-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
वहीं कोटला के एसडीओ कुंदन ने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच करवाई जाएगी। लेकिन जनता का सवाल बरकरार है—₹82 हजार का बिल क्या खुद में जांच का पर्याप्त आधार नहीं?
अब निगाहें हिमाचल प्रदेश प्रशासन पर टिकी हैं। क्या आम उपभोक्ता को न्याय मिलेगा या “स्मार्ट” मीटर के खिलाफ प्रदेशभर में बड़ा जनआंदोलन खड़ा होगा?
Source Himachal Khabar














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