10–15 हजार कमाने वाले मोची पर 6.79 करोड़ का GST बकाया! क्या सरकारी सिस्टम में बिना जांच के बन जाती हैं फर्जी कंपनियां
विशेष रिपोर्ट | बालोतरा
राजस्थान के बालोतरा जिले से सामने आया एक मामला देश की जीएसटी व्यवस्था और सरकारी सत्यापन प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। महीने में महज 10 से 15 हजार रुपये कमाने वाले एक साधारण जूता कारीगर के नाम पर कथित तौर पर फर्जी एक्सपोर्ट कंपनी बनाकर करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाया गया और अब उसी व्यक्ति को 6,78,97,357 रुपये की जीएसटी रिकवरी का नोटिस थमा दिया गया है।
गुड़ामालानी के जीनगर मोहल्ला निवासी जितेंद्र कुमार जीनगर का कहना है कि उन्होंने कभी कोई कंपनी नहीं बनाई, न जीएसटी पंजीकरण कराया और न ही उनका तमिलनाडु से कोई व्यावसायिक संबंध है। इसके बावजूद तमिलनाडु के वाणिज्यिक कर विभाग ने उनके नाम पर करोड़ों रुपये की कर देनदारी बताते हुए नोटिस जारी कर दिया। इतना ही नहीं, विभाग के निर्देश पर उनका बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया।
सरकारी व्यवस्था पर उठते बड़े सवाल
यह मामला केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि जीएसटी पंजीकरण और निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी व्यक्ति के नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाया गया, तो—
- क्या जीएसटी पंजीकरण के समय वास्तविक सत्यापन नहीं हुआ?
- करोड़ों रुपये के लेन-देन के दौरान विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां थी?
- जब फर्जी कंपनी कारोबार कर रही थी, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- रिकवरी नोटिस भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान और वास्तविक स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई?
पैन-आधार के दुरुपयोग की आशंका
जितेंद्र कुमार के अनुसार, वर्ष 2018 में उन्होंने बाड़मेर की एक निजी फाइनेंस कंपनी से लोन लेने के लिए अपना पैन और आधार कार्ड जमा कराया था। उन्हें आशंका है कि वहीं से उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर “श्री शिवम एक्सपोर्ट्स” नाम से फर्जी कंपनी का पंजीकरण कराया गया।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच कागजों पर करोड़ों रुपये का टर्नओवर दिखाकर भारी जीएसटी चोरी की गई।
बैंक पहुंचने पर खुला राज
25 जुलाई को जब जितेंद्र कुमार अपने एसबीआई खाते में लेन-देन के लिए पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि तमिलनाडु वाणिज्यिक कर विभाग के आदेश पर उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है। इसके बाद उन्हें करोड़ों रुपये की रिकवरी का नोटिस मिलने से परिवार भी सदमे में है।
क्या बदलने की जरूरत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से बचने के लिए जीएसटी पंजीकरण में मजबूत केवाईसी, आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, नियमित भौतिक जांच और संदिग्ध कंपनियों की समय पर पहचान जैसी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
यदि किसी निर्दोष व्यक्ति के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनी बनाई जा सकती है और वर्षों तक करोड़ों रुपये का कारोबार कागजों में चलता रहता है, तो यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरी कर व्यवस्था और दस्तावेज सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और संबंधित पक्ष के दावों पर आधारित है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं, तो निष्कर्ष बदल सकते हैं।
Source Rajeshthan Patrika
