बाबूलाल मरांडी एवं प्रदीप यादव की सियासी राह अलग-अलग दिशा में -सियासी तलाक की औपचारिकता शेष
गोड्डा।
राजनीति में ना कोई किसी का स्थाई दोस्त होता है और न दुश्मन। यह उक्ति झारखंड की राजनीति में एक बार फिर चरितार्थ होने जा रही है। करीब दो दशक से अधिक समय से एक दूसरे के साथ कदमताल करने वाले झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं झारखंड विकास मोर्चा के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी तथा उनके सर्वाधिक विश्वस्त सिपहसालार के रूप में चर्चित विधायक प्रदीप यादव की राजनीतिक राह अलग-अलग दिशा की ओर बढ़ रही है।
श्री मरांडी जहां भाजपा में घर वापसी की ओर आगे बढ़ रहे हैं, वही श्री यादव अपने पुराने राजनीतिक घर में लौटने के बदले कांग्रेस पार्टी की ओर उन्मुख हो रहे हैं। दोनों की राह विपरीत दिशा में आगे बढ़ रही है।
उल्लेखनीय है कि श्री मरांडी एवं श्री यादव आर एस एस एवं भाजपा की राजनीतिक पाठशाला के ही छात्र रहे हैं। झारखंड राज्य के अस्तित्व में आने से पूर्व से ही श्री मरांडी एवं श्री यादव सांगठनिक रूप से साथ साथ रहे हैं। एक राज्य के रूप में झारखंड के अस्तित्व में आने से पहले भारतीय जनता पार्टी ने वनांचल कमेटी बनाई थी, जिसके अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी एवं महासचिव प्रदीप यादव थे। दोनों ने मिलकर भाजपा के संगठन को मजबूत बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। सन 2000 में एक राज्य के तौर पर झारखंड का गठन होने पर जब बाबूलाल मरांडी नवोदित सूबे के पहले मुख्यमंत्री बनाए गए थे, उस समय श्री यादव उनके सर्वाधिक विश्वस्त एवं ताकतवर मंत्री थे। कालांतर में जब श्री मरांडी ने भाजपा से अलग होकर अपनी नई पार्टी झारखंड विकास मोर्चा बनाई, तो श्री यादव भी कुछ दिनों के बाद भाजपा छोड़कर झाविमो में शामिल हो गए। झाविमो में श्री यादव की हैसियत श्री मरांडी के बाद दूसरे नंबर के नेता की थी।
लेकिन बदले सियासी परिस्थिति में बाबूलाल मरांडी जहां अपने पुराने राजनीतिक घर भाजपा में लौटने की तैयारी कर रहे हैं, वही श्री यादव भाजपा में घर वापसी के बदले देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस कार्य में झाविमो के एक अन्य विधायक बंधु तिर्की भी उनका साथ दे रहे हैं। जाहिर है झाविमो के 3 विधायकों में से दो जहां कांग्रेस की ओर उन्मुख हो रहे हैं, वहीं भाजपा में घर वापसी के सवाल पर बाबूलाल मरांडी अकेली पड़ रहे हैं।
श्री मरांडी के भाजपा में घर वापसी की सुगबुगाहट के बीच झाविमो के अन्य दो विधायक प्रदीप यादव एवं बंधु तिर्की दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर अपनी भावी राजनीतिक राह का संकेत दे चुके हैं। गुरुवार को एक सवाल के जवाब में श्री यादव ने इस बात का स्पष्ट संकेत दिया कि वे भाजपा में वापस होने वाले नहीं हैं। उनका अगला राजनीति घर कांग्रेस हो सकता है। एक सवाल के जवाब में श्री यादव ने बताया कि बीते एक दशक के दौरान वे महसूस कर चुके हैं कि भाजपा में वापस लौट कर वे गरीबों, बेरोजगारों, किसानों, विस्थापित एवं अकलियतों की लड़ाई नहीं लड़ सकते हैं।
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अभय पलिवार गोड्डा