बाबूलाल मरांडी की राजनीति कैरियर का अंत ? BJP ने लिया बड़ा फैसला, झारखंड में हड़कंप !

रघुबर दास की वापसी से झारखंड भाजपा में हलचल, बाबूलाल मरांडी और निशिकांत दुबे की मुश्किलें बढ़ीं

बाबूलाल मरांडी की राजनीति का अंत ? BJP ने लिया बड़ा फैसला, झारखंड में हड़कंप !

रघुबर दास, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों से राजनीति से दूरी बनाए रखी थी, अब एक बार फिर भाजपा की सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यपाल, रघुबर दास ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया। उनके इस्तीफे ने पार्टी के भीतर कई राजनैतिक समीकरणों को एक बार फिर बदलने का संकेत दिया है।

 

सूत्रों के अनुसार, रघुबर दास को झारखंड भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

यह कदम भाजपा के लिए राज्य में अपनी साख को पुनः स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। खासतौर पर तब जब झारखंड भाजपा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष पर विधानसभा टिकट बेचने के गंभीर आरोप लग चुके हैं।

पार्टी में यह विवाद पार्टी के लिए गंभीर संकट का रूप ले सकता था, और रघुबर दास का इस्तीफा और उनकी संभावित वापसी, भाजपा के इस संकट से उबरने का प्रयास प्रतीत हो रहा है।

2014 में रघुबर दास के नेतृत्व में भाजपा ने झारखंड विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी। उस समय भाजपा ने राज्य में अपनी ताकत दिखाई थी, लेकिन 2019 में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर हुआ।

खासतौर पर बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा को 20 सीटों तक ही सीमित रहना पड़ा था, जबकि रघुबर दास के नेतृत्व में पार्टी को बेहतर परिणाम प्राप्त हुए थे।

इस हार ने झारखंड भाजपा में एक गहरी फूट को उजागर किया, जहां एक ओर निशिकांत दुबे की लॉबी तो दूसरी ओर रघुबर दास की लॉबी ने पार्टी की दिशा और नेतृत्व को लेकर खींचतान शुरू कर दी थी।

इसी बीच, रघुबर दास की संभावित वापसी ने भाजपा के अंदर की राजनीति को और भी जटिल बना दिया है। खासतौर पर बाबूलाल मरांडी के लिए यह खबर चिंता का कारण बन सकती है।

मरांडी आदिवासी समुदाय में भाजपा का प्रभाव बढ़ाने में विफल रहे हैं और उनके नेतृत्व में पार्टी को विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। अगर रघुबर दास को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो उनके लिए पार्टी में अपना स्थान बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

हालांकि, रघुबर दास के समर्थक यह तर्क देते हैं कि उनकी वापसी से भाजपा को राज्य में नया जीवन मिल सकता है,

और खासकर आदिवासी वोटबैंक में भाजपा को मजबूती मिल सकती है। रघुबर दास के पास राज्य के विकास के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण और कार्यशैली है, जो पार्टी को आगामी चुनावों में मजबूती प्रदान कर सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के अंदर इन दो प्रमुख लॉबियों के बीच का संघर्ष और रघुबर दास की वापसी,

आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक बड़ा फैक्टर साबित हो सकती है। अगर भाजपा अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाने में सफल होती है, तो झारखंड में सत्ता की दिशा तय करने में रघुबर दास का हाथ महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा रघुबर दास को कितनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपती है और इससे राज्य की राजनीति में किस तरह के बदलाव आते हैं।

अगर रघुबर दास को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया जाता है, तो यह बाबूलाल मरांडी समेत अन्य भाजपा नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, और पार्टी में सत्ता संघर्ष और भी तेज हो सकता है।

 

Md shahzeb khan

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