आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण कार्य दो वर्षों से अधूरा, बच्चों के विकास पर संकट
आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण कार्य दो वर्षों से अधूरा, बच्चों के विकास पर संकट
Anganwadi center construction work is incomplete for two years, children’s development is in danger
दुमका, जरमुंडी प्रखंड (चंद्रदीप गांव):
सरकारी योजनाओं के दावों की हकीकत उजागर करती एक और तस्वीर चंद्रदीप गांव में सामने आई है, जहां करीब दो वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। मनरेगा योजना के तहत 2022-23 में शुरू हुए इस केंद्र का कार्य संख्या 3411003004/एवी/3097 है। इसकी कुल लागत 6.6 लाख रुपये निर्धारित की गई थी, जिसमें से अब तक 5,55,067 रुपये की निकासी हो चुकी है। बावजूद इसके, केंद्र का निर्माण अभी अधूरा है।
अधूरी सुविधाएं और खराब सामग्री
निर्माण कार्य में अब तक प्लास्टर, फर्श, दरवाजे, और वायरिंग जैसे मूलभूत कार्य अधूरे हैं। इतना ही नहीं, निर्माण में इस्तेमाल की गई ईंटें भी गुणवत्तापूर्ण नहीं हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आज तक कोई भी अधिकारी निरीक्षण के लिए नहीं आया है। अधूरे भवन के कारण आंगनबाड़ी केंद्र को खुद का भवन नहीं मिल सका है, जिससे बच्चों को पोषणयुक्त भोजन, प्रारंभिक शिक्षा, और टीकाकरण जैसी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
निर्माणकर्ता और वेंडर के बीच भुगतान का विवाद
जब इस मामले में निर्माणकर्ता त्रिभुज मांझी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें अब तक वेंडर ब्रह्मदेव कुमार के माध्यम से केवल 1.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। इसी राशि से जितना कार्य संभव था, उतना कराया गया। बाकी राशि का भुगतान नहीं होने के कारण काम ठप पड़ा हुआ है।
प्रशासन की उदासीनता से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र समाज के सबसे छोटे सदस्यों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है। यह न केवल बच्चों को पोषणयुक्त भोजन प्रदान करता है, बल्कि उन्हें प्रारंभिक शिक्षा, टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं भी देता है। लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण चंद्रदीप गांव के बच्चे और किशोरियां इन सुविधाओं से वंचित हैं।
प्रशासन कब लेगा संज्ञान?
अधूरे भवन के चलते गांव में बच्चों और समाज को भारी नुकसान हो रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित विभाग और अधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेते हैं या यह भवन यूं ही अधूरा रह जाएगा।
– रिपोर्ट: रमेश कुमार, नोनीहाट,