राजापाथर: शिक्षक की कमी और जर्जर भवनों से जूझता मध्य विद्यालय

राजापाथर: शिक्षक की कमी और जर्जर भवनों से जूझता मध्य विद्यालय

दुमका, 21 दिसंबर: शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले देश में आज भी कई ग्रामीण विद्यालयों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। दुमका जिले के रामगढ़ प्रखंड के बौडिया पंचायत स्थित राजकीय मध्य विद्यालय राजापाथर इसका एक उदाहरण है।

यह विद्यालय, जिसमें 153 बच्चे नामांकित हैं और प्रतिदिन लगभग 120 बच्चे उपस्थित रहते हैं, केवल एकमात्र शिक्षक विश्वनाथ उरांव के सहारे चल रहा है। बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाने वाले उरांव ने बताया कि वर्ग 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाना और विद्यालय का संचालन अकेले करना बेहद चुनौतीपूर्ण है।

एक शिक्षक, दो कमरे, सैकड़ों सपने

शिक्षक उरांव ने बताया कि पांच कक्षाओं वाले इस विद्यालय के तीन कमरे जर्जर अवस्था में हैं। इन कमरों की छत और दीवारें इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि कभी भी हादसा हो सकता है। इसलिए बच्चों को केवल दो कमरों में समेटकर पढ़ाई कराई जाती है।

“मैं दो कक्षाओं में बच्चों को अलग-अलग बैठाकर पढ़ाने की कोशिश करता हूं। छोटे बच्चों की पढ़ाई न रुके, इसलिए कक्षा 8 के बच्चों की मदद लेनी पड़ती है,” शिक्षक उरांव ने भावुकता से कहा।

इसके अलावा, सप्ताह में दो दिन उरांव को बाजार जाकर मिड-डे मील के लिए फल और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदनी पड़ती है, जिससे कक्षाएं प्रभावित होती हैं।

65 विद्यालयों में सिर्फ एक शिक्षक

इस गंभीर समस्या पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मुकुंद मरांडी ने कहा कि रामगढ़ प्रखंड में 65 विद्यालय ऐसे हैं, जो सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द राजापाथर विद्यालय में अतिरिक्त शिक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

बुनियादी ढांचे की कमी

राजापाथर के विद्यालय में न केवल शिक्षक की कमी है, बल्कि भवनों की दयनीय स्थिति भी बच्चों के लिए खतरा बनी हुई है। जर्जर भवनों में पढ़ाई करने वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित कैसे हो सकता है, यह एक बड़ा सवाल है।

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समाधान की आवश्यकता

राजकीय मध्य विद्यालय राजापाथर का हाल केवल एक उदाहरण है। ऐसे सैकड़ों विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। शिक्षा विभाग को न केवल शिक्षकों की नियुक्ति पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी प्राथमिकता में शामिल करना होगा।

(रिपोर्ट: रमेश कुमार, समाचारआजतक)

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