गोड्डा जिले में सड़क हादसे में सरकारी शिक्षक की मौत, परिवार में मचा कोहराम

गोड्डा जिले में सड़क हादसे में सरकारी शिक्षक की मौत, परिवार में मचा कोहराम

 

गोड्डा जिला के पथरगामा थाना क्षेत्र के गोरसंडा के पास सोमवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें पथरगामा थाना क्षेत्र के सोनारचक निवासी दिलीप साह (48 वर्ष) की जान चली गई। दिलीप साह पथरगामा से गोड्डा आ रहे थे, तभी मुख्य मार्ग पर किसी अज्ञात वाहन के चपेट में आ गए। वाहन की टक्कर से वे गिरकर बुरी तरह घायल हो गए।

घटना के बाद आसपास के लोगों ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए एंबुलेंस को सूचित किया और घायल दिलीप को तुरंत सदर अस्पताल ले जाने का प्रयास किया।

हालांकि, अस्पताल लाते समय ही दिलीप साह की मौत हो गई। सदर अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे की खबर फैलते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। दिलीप साह के घर वाले अस्पताल पहुंचे, जहां उनका बेटा अपने पिता के शव के पास लिपटकर जोर-जोर से रोने लगा। यह दृश्य देखकर अस्पताल में मौजूद हर कोई भावुक हो गया।

 

जानकारी के अनुसार, दिलीप साह सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और पथरगामा के कोहवारा स्कूल में पढ़ाते थे। सोमवार को विद्यालय का काम खत्म करने के बाद वे डीइओ कार्यालय जा रहे थे, तभी यह दर्दनाक हादसा हुआ। उनके परिवार में पत्नी, बेटा और दो बेटियां हैं। उनके निधन के बाद परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है।

 

घटना के बाद पुलिस को सूचना दी गई और शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। सोमवार देर शाम शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका, लेकिन मंगलवार सुबह शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

 

इस दुखद घटना ने ना केवल मृतक के परिवार, बल्कि पूरे गांव को भी गहरे शोक में डुबो दिया है। दिलीप साह की मासूम बेटियां और उनका बेटा अब अपने पिता के बिना जीवन जीने को मजबूर होंगे। उनका अचानक इस तरह से चला जाना पूरे गांव के लिए एक भारी आघात बनकर आया है।

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भावुकता की बयां करती तस्वीरें और एक पिता के खोने का दर्द

 

जब दिलीप साह के बेटे ने अस्पताल में अपने पिता के शव को देखा, तो उनका दिल टूट गया। वह अपने पिता की गोदी में सिर रखकर सुबक-सुबक कर रोने लगे। परिवार के अन्य सदस्य भी अपने प्रिय व्यक्ति को खोने के दुख में बेहल गए। उनका परिवार उस पिता के बिना अब कुछ सोच भी नहीं पा रहा था, जो हमेशा उनके लिए एक मजबूत सहारा था।

 

यह घटना यह दर्शाती है कि कभी-कभी जीवन में ऐसा दुख आता है, जिसे शब्दों में नहीं व्यक्त किया जा सकता। दिलीप साह का परिवार इस असहनीय दर्द को कैसे सह पाएगा, यह समय ही बताएगा, लेकिन उनका दुख पूरे गांव में गहरा शोक छोड़ गया है।

 

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