एक शिक्षक के भरोसे सौ सपने: प्राथमिक विद्यालय लगवा की दयनीय स्थिति

एक शिक्षक के भरोसे सौ सपने: प्राथमिक विद्यालय लगवा की दयनीय स्थिति

 

जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत भालकी पंचायत के प्राथमिक विद्यालय लगवा में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति अत्यंत गंभीर है। लगभग 100 से अधिक बच्चों के नामांकन वाले इस विद्यालय में केवल एक शिक्षक के भरोसे शिक्षण कार्य संचालित किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल बच्चों के भविष्य के लिए चिंताजनक है, बल्कि शिक्षा के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन है।

 

विद्यालय का वर्तमान परिदृश्य

 

विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों का नामांकन है। लेकिन केवल एक शिक्षक की नियुक्ति के कारण शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है। बच्चों के अभिभावकों और रसोइयों ने बताया कि जब शिक्षक विद्यालय में उपस्थित नहीं होते, तो बच्चे मिड-डे मील का इंतजार करते हैं। भोजन के बाद वे अपने-अपने घर चले जाते हैं। इस स्थिति में न तो पठन-पाठन का माहौल बन पाता है और न ही विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव हो पाता है।

 

शिक्षक पर बढ़ता दबाव

 

एकमात्र शिक्षक पर कई जिम्मेदारियां हैं। उन्हें एक साथ सभी कक्षाओं को संभालना पड़ता है, जो बेहद कठिन कार्य है। इसके अलावा, शिक्षकों को प्रशासनिक कार्य, फाइलें मेंटेन करना, और विभागीय बैठकों में शामिल होना पड़ता है। इन सब कारणों से वे बच्चों को उचित ध्यान नहीं दे पाते।

 

शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन

 

शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार, 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। लेकिन लगवा विद्यालय में 100 से अधिक बच्चों के लिए केवल एक शिक्षक की नियुक्ति ने विभागीय नियमों की पोल खोल दी है। यह स्थिति शिक्षा विभाग की गंभीर उपेक्षा को दर्शाती है।

 

शिक्षक की भूमिका और बच्चों का भविष्य

 

एक शिक्षक का कार्य केवल पढ़ाना ही नहीं है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास, नैतिकता, और कर्तव्य परायणता का मार्गदर्शन देना भी है। शिक्षकों का अभाव न केवल बच्चों के सीखने के स्तर को प्रभावित करता है, बल्कि उनके भविष्य को भी अंधकारमय बना देता है।

 

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का बयान

 

इस समस्या पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मोहम्मद जमालुद्दीन ने कहा कि जिले में शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या है।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्राथमिक विद्यालय लगवा में जल्द ही शिक्षकों की कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

समाधान की आवश्यकता

शिक्षा विभाग को इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान निकालने की आवश्यकता है। ऐसे विद्यालयों में जहां केवल एक शिक्षक है, वहां अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए।

यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रत्येक बच्चे को समान रूप से शिक्षा का अधिकार प्राप्त हो।

निष्कर्ष

एक शिक्षक पर आधारित शिक्षा व्यवस्था बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

शिक्षा विभाग और प्रशासन को मिलकर इस समस्या का हल निकालना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके।

 

रिपोर्ट: नोनीहाट से रमेश कुमार, (जरमुंडी समाचारआजतक)

 

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