खनन माफियाओं का तांडव दिन के उजाले में: पहाड़ों का अवैध खनन
खनन माफियाओं का तांडव दिन के उजाले में: पहाड़ों का अवैध खनन
दुमका जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत बौडीया और काँजो पंचायतों के बॉर्डर पर स्थित पहाड़ों में खनन माफियाओं द्वारा दिन के उजाले में बिना किसी भय के अवैध खनन हो रहा है। खनन माफिया जेसीबी मशीनें और बारूद का इस्तेमाल कर, बिना किसी सरकारी अनुमति के पहाड़ों को खत्म कर रहे हैं। इससे पर्यावरण को गहरा नुकसान हो रहा है और सरकारी राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है।
प्रशासन और वन विभाग की निष्क्रियता के चलते माफियाओं के हौंसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें किसी का डर नहीं है। स्थानीय लोग मामूली लोभ के कारण इस अवैध गतिविधि को अनदेखा कर रहे हैं। प्रतिदिन तेज धमाकों की आवाज से आसपास के ग्रामीण इलाकों में रह रहे लोग भी परेशान हैं।
प्राकृतिक और पर्यावरणीय नुकसान:
पहाड़ न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का हिस्सा हैं, बल्कि वे जलवायु नियंत्रण, जैव विविधता, और जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पहाड़ बारिश के पानी को सोखते हैं और धीरे-धीरे नदियों में छोड़ते हैं, जिससे जल का स्तर स्थिर रहता है। पहाड़ों के बिना जल चक्र में बाधा उत्पन्न होगी और जल संकट की स्थिति आ सकती है।
पहाड़ों में कई तरह के पौधे और जानवर पाए जाते हैं, जो जैव विविधता के लिए अहम हैं।
इनके समाप्त होने से कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच सकती हैं। साथ ही, पहाड़ मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, जो खेती योग्य भूमि के संरक्षण के लिए आवश्यक है।
जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में भी पहाड़ अहम भूमिका निभाते हैं। ये सूर्य की किरणों को परावर्तित करते हैं और क्षेत्र का तापमान नियंत्रित करते हैं।
पहाड़ों के नष्ट होने से जलवायु परिवर्तन की समस्याएं और भी गंभीर हो सकती हैं।
संबंधित विभागों से अपेक्षित कदम:
प्रकृति के इस विनाश को रोकने के लिए संबंधित विभागों को तुरंत ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। वनों की कटाई रोकने, अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई करने, और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सतर्कता जरूरी है।
यदि समय रहते ठोस उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य की पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
समाचार आज तक से, नोनीहाट से रमेश कुमार की रिपोर्ट।