कैसे सरकारी बैंकों को चूना लगाकर मुनाफ़ा कमा रहे हैं अडानी?

कैसे सरकारी बैंकों को चूना लगाकर मुनाफ़ा कमा रहे हैं अडानी?

नई दिल्ली: भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करीबी रिश्तों की चर्चा आम है। हाल ही में, कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनिट ने सोशल मीडिया पर एक खुलासा किया है, जो इन दिनों ख़ूब वायरल हो रहा है।

इस खुलासे में दावा किया गया है कि अडानी समूह ने सरकारी बैंकों के साथ किए गए ‘हेयरकट’ समझौतों के ज़रिए बैंकों को भारी नुक़सान पहुंचाया है।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, अडानी समूह ने 10 कंपनियों का अधिग्रहण किया, जो आर्थिक संकट से जूझ रही थीं। इन कंपनियों पर सरकारी बैंकों का लगभग 62,000 करोड़ रुपये का कर्ज़ बकाया था।

हालांकि, जब अडानी समूह ने इन कंपनियों को ख़रीदा, तो बैंकों ने महज़ 16,000 करोड़ रुपये के निपटान पर समझौता कर लिया।

इसे आर्थिक शब्दावली में ‘हेयरकट’ कहा जाता है, जो इस मामले में 74% था। मतलब, बैंकों ने 46,000 करोड़ रुपये का भारी नुक़सान झेलकर कंपनियों को अडानी के हवाले कर दिया।

कौन सी कंपनियां शामिल हैं?

अडानी समूह ने जिन कंपनियों का अधिग्रहण किया, वे हैं:

1. HDIL (Project BKC)

2. Radius Estates & Developers 

3. National Rayon Corporation

4. Essar Power M.P. Ltd

5. Dighi Port Limited

6. Lanco Amarkantak Power

7. Coastal Energen Ltd

8. Aditya Estates

9. Karaikal Port

10. Korba West Power Company

सोशल मीडिया का लिंक यहां एक उपलब्ध है नीचे क्लिक करें

https://www.facebook.com/share/v/iuaAEtxvtcTTDbmE/?mibextid=xfxF2i

सरकारी बैंकों को लगा बड़ा चूना:

सरकारी बैंकों ने 74% का हेयरकट सहकर इन कंपनियों को अडानी समूह को सौंप दिया। वही बैंक जो अगर आप जैसे आम लोगों से दो महीने की किश्त ना दी जाए, तो घर पर वसूली के लिए दबाव डालते हैं और बेइज़्ज़ती करते हैं।

यही बैंक, अडानी जैसी बड़ी कंपनियों को भारी रियायतें देते हैं। 

 

सरकार और बैंकों की भूमिका:

यह वही सरकारी बैंक हैं, जिन्हें सरकार ने पिछले चार सालों में 3.5 लाख करोड़ रुपये की मदद दी है।

यह रकम GST और अन्य टैक्स से आम जनता से वसूली गई है। इस खुलासे के बाद सवाल उठता है कि सरकार और बैंकों की इस नीति से आम जनता को क्या फायदा हो रहा है और क्या यह सिर्फ़ चुनिंदा उद्योगपतियों को फ़ायदा पहुंचाने की रणनीति है?

यह खुलासा दिखाता है कि कैसे अडानी-मोदी की जोड़ी सरकारी बैंकों की नीतियों का फ़ायदा उठाकर मुनाफ़ा कमा रही है।

आम आदमी को छोटी-छोटी देनदारियों के लिए दबाव सहना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर उद्योगपति बड़ी रकम माफ़ करवा लेते हैं।

सुप्रिया श्रीनिट का यह खुलासा सरकार की नीति और उसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।

आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा कैसे और कहां खर्च हो रहा है,

यह सवाल हर किसी को पूछना चाहिए।  

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