सिख विरोधी दंगों में राजीव गाँधी का वो बयान जिसने मचा दी थी सनसनी , आखिर क्या था वो बयान 

by md Shahzeb khan

आजकल अमरीका के कैलीफोर्निया में जा बसे जसवीर सिंह ने अपनी कहानी ज़रूर सुनाई.

जसवीर बताते हैं, “यमुना पार शाहदरा में मेरा संयुक्त परिवार था. परिवार के 26 लोगों का क़त्ल कर दिया गया. हमारी माँ-बहनों से पूछो कि कैसे वे 33 वर्षों से विधवा का जीवन गुज़ार रहीं हैं.”

जसवीर कहते हैं, “हमारे कुटुंब में पूरे परिवार को मार डाला. बच्चों के सिर से बाप का साया उठ गया. कोई ज़ेबकतरा बन गया, किसी को स्मैक की लत लग गई.”

 

सबसे बडा सवाल उठा पुलिस की भूमिका पर. पुलिस ने न सिर्फ़ शिकायतों की अनदेखी की, बल्कि कई मामलों में सिखों पर हुए हमलों में भीड़ का साथ दिया.

 

दंगों के बाद सिखों की तरफ़ से लड़ने वाले वकील और “व्हेन ए ट्री शुक डेल्ही” के सह-लेखक हरविंदर सिंह फूल्का कहते हैं, “पुलिस ने सिखों को बचाने के बजाए उन्हीं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की.”

 

फूल्का बताते हैं, “कल्याणपुरी थाने में तक़रीबन 600 लोगों को मारा गया. पहली नवंबर को ज़्यादातर क़त्लेआम हुआ. पुलिस ने वहाँ 25 लोगों को हिरासत में लिया और सभी लोग सिख थे.”

वे कहते हैं, “एक और दो नवंबर को इनके अलावा किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया. इतना ही नहीं पुलिस ने सिखों को पकड़कर भीड़ के हवाले कर दिया.”

 

‘क्या कोई योजना थी’

सवाल उठता है कि यह सब कुछ अचानक हुआ या फिर इसके लिए बाक़ायदा योजना बनाई गई थी.

 

किताब के लेखक मनोज मित्ता मानते हैं कि सब कुछ राजनीतिक नेताओं के इशारे पर हुआ.

 

पहले दिन यानी 31 अक्तूबर को छिटपुट हिंसा हुई लेकिन एक और दो नवंबर को जो कुछ हुआ, वह बिना योजना के नहीं हो सकता था.

 

मित्ता कहते हैं, “जिस दिन इंदिरा गाँधी की हत्या हुई उस दिन जो घटनाएँ हुईं, उन्हें आप स्वाभाविक कह सकते हैं, लेकिन उस दिन किसी सिख का क़त्ल नहीं हुआ था.”

वे बताते हैं, “क़त्ल की शुरुआत पूरे 24 घंटों के बाद यानी अगले दिन एक नवंबर से हुई थी.”

 

मित्ता का कहना है, “नेताओं ने अपने-अपने इलाकों में बैठकें की और अगले दिन लोग हथियारों के साथ पूरी तैयारी से निकले थे. पुलिस उन्हें नज़रअंदाज़ कर रही थी. उनकी मदद कर रही थी.”

 

हरविंदर सिंह फूल्का का भी तर्क है कि जिस तरह से इन घटनाओं को अंज़ाम दिया गया, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि सब कुछ योजनाबद्ध था.

 

वे कहते हैं, “भीड़ के पास इस बात की सूची थी कि किस घर में सिख रहते हैं. उन्हें हज़ारों लीटर केरोसीन मुहैया कराया गया. ज्वलनशील पाउडर उन्हें दिया गया. जो लोहे की छड़ें लोगों के हाथों में थी, वे एक आकार-प्रकार की थीं.”

एक सवाल यह भी उठता है कि पुलिस ने ऐसा क्यों किया? उसने अपने फ़र्ज़ को क्यों नहीं निभाया. आखिर क्यों पुलिस राजनीतिज्ञों के हाथों में खिलौना बन गई.

 

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वेद मारवाह को 1984 के सिख विरोधी दंगों में पुलिस की भूमिका की जाँच की जिम्मेंदारी सौंपी गई थी.

 

वे कहते हैं, “पुलिस एक औज़ार के समान है और आप जैसा चाहें वैसा इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. जो पुलिस अधिकारी बहुत अधिक महत्वाकांक्षी होते हैं वे देखते हैं कि राजनेता उनसे क्या चाहते हैं. वो इशारों में बात समझते हैं. उन्हें लिखित या मौखिक आदेश देने की ज़रूरत नहीं होती.”

 

वे बताते हैं, “जिन इलाकों में पुलिस नेताओं के इशारों पर कठपुतली नहीं बनीं, वहाँ तो स्थिति नियंत्रण में रही. मसलन चाँदनी चौक में इतना बड़ा गुरुद्वारा है. वहाँ किसी की जान को नुक़सान नहीं पहुँचा क्योंकि उस वक़्त मैक्सवेल परेरा पुलिस उपायुक्त थे. उन्होंने पुख़्ता प्रबंध किए कि चाँदनी चौक में कोई गड़बड़ी न होने पाए. गड़बड़ी वहाँ हुई जहाँ पुलिस ने राजनीति के दबाव के सामने घुटने टेक दिए.”

दंगों के 21 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में इसके लिए माफ़ी माँगी और कहा कि जो कुछ भी हुआ, उससे उनका सिर शर्म से झुक जाता है.

 

लेकिन क्या इतना कहने भर से ही सरकार का फ़र्ज़ पूरा हो गया? क्या इससे आज़ाद भारत के सबसे सबसे बुरे हत्याकांड की यादें मिट गईं?

 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद कहते हैं, “इसका ज़बाव तो वही दे सकता है जो न्याय की अपेक्षा करता है. मैं कहूँ कि न्याय मिल गया है तो वे कहेंगे कि आपने दर्द देखा ही कहां हैं? आप कैसे कह सकते हैं कि न्याय मिला या नहीं मिला? जिसने चोट खाई है, जिसे दर्द हुआ है, वही इसका ज़बाव दे सकता है.”

 

1984 के बाद भी भारत में दंगों का सिलसिला रुका नहीं है. वर्ष 1988 के भागलपुर दंगे, वर्ष 1992-93 के मुंबई दंगे और वर्ष 2002 के गुजरात दंगे.

 

लेकिन कितने ऐसे लोग हैं जिन्हें दंगे करवाने के ज़ुर्म में सज़ा मिली? शायद यही कारण है कि इस तरह की घटनाएँ आज के भारत में भी होती रहती हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अगर हां तो यहां दबाए
1
Need Help?
क्या आप कुछ खबरें देना चाहते है या खबर पाना चाहते है?