New Delhi:देश के वरिष्ठ पत्रकार डॉ वेद प्रताप वैदिक का निधन
देश के वरिष्ठ पत्रकार डॉ वेद प्रताप वैदिक का निधन
दिल्ली।
देश के विश्वविद्यालयों में हिंदी और भारतीय भाषाओं के उन्नयन के लिए जाने जाने वाले डॉ. वेद प्रताप वैदिक के निधन से पत्रकरिता जगत में शोक का माहौल हैं।
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वे न केवल एक बड़े पत्रकार थे, बल्कि भारत की भाषाओं को उनका उचित स्थान दिलाने के लिए सतत संघर्ष करने वाले एक महान व्यक्ति भी थे।
उन्होंने अपनी ज़िन्दगी भारत की भाषाओं को मौलिक चिंतन की भाषा बनाने में लगाई। उन्होंने इस दिशा में महर्षि दयानंद, महात्मा गांधी और डॉ. राममनोहर लोहिया जैसे महान व्यक्तियों की महान परंपरा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
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पत्रकारिता, राजनीतिक चिंतन, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, हिंदी के लिए अपूर्व संघर्ष, विश्व यायावरी, प्रभावशाली वक्तृत्व, संगठन-कौशल आदि अनेक क्षेत्रों में एक साथ मूर्धन्यता प्रदर्षित करने वाले अद्वितीय व्यक्त्तिव के धनी डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का जन्म 30 दिसंबर 1944 को पौष की पूर्णिमा पर इंदौर में हुआ। वे सदा प्रथम श्रेणी के छात्र रहे।
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वे रुसी, फारसी, जर्मन और संस्कृत के भी जानकार हैं। उन्होंने अपनी पीएच.डी. के शोधकार्य के दौरान न्यूयार्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी, मास्को के ‘इंस्तीतूते नरोदोव आजी’, लंदन के ‘स्कूल ऑफ ओरिंयटल एंड एफ्रीकन स्टडीज़’ और अफगानिस्तान के काबुल विश्वविद्यालय में अध्ययन और शोध किया।
वैदिक नेे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज’ से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। वे भारत के ऐसे पहले विद्वान हैं, जिन्होंने अपना अंतरराष्ट्रीय राजनीति का शोध-ग्रंथ हिन्दी में लिखा। पिछले 60 वर्षों में हजारों लेख और भाषण! वे लगभग 10 वर्षों तक पीटीआई भाषा (हिन्दी समाचार समिति) के संस्थापक-संपादक और उसके पहले नवभारत टाइम्स के संपादक (विचारक) रहे हैं।
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फिलहाल दिल्ली के राष्ट्रीय समाचार पत्रों तथा प्रदेशों और विदेशों के लगभग 200 समाचार पत्रों में भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर डाॅ. वैदिक के लेख हर सप्ताह प्रकाशित होते हैं।
हम सभी उन्हें याद करेंगे और उनके योगदान को सम्मानित करेंगे। उनका जाना बहुत दुखद है, लेकिन हमें यह सोचकर संभवतः थोड़ी राहत मिलती है कि वे हमारी यादों में हमेशा जीवित रहेंगे।