झारखंड में राज्य की सभी पंचायतों में एक-एक दवा दुकान, फार्मासिस्ट का होना ज़रूरी नहीं

झारखंड में राज्य की सभी पंचायतों में एक-एक दवा दुकान,

फार्मासिस्ट का होना ज़रूरी नहीं

रांची।

झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में फार्मासिस्ट की उपलब्धता की कमी के सामने लोगों को दवाओं की उपलब्धता में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता रहा है।

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 इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने राज्य की सभी पंचायतों में ऐसी एक-एक दवा दुकान खोलने का निर्णय लिया है। इन दुकानों में बिना फार्मासिस्ट की मदद से भी वैसी दवाओं की बिक्री हो सकेगी, जिनके लिए फार्मासिस्ट का होना ज़रूरी नहीं होगा।

 इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता में सुधार होगा और युवाओं को अपना करियर बढ़ाने का भी मौका मिलेगा। इस पहल का सफलता से झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़िया सुविधाएं मिलेंगी।

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स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए पांच अप्रैल तक आवेदन मुखिया या पंचायत सचिवों के माध्यम से मांगे हैं। पारासिटामोल समेत फंगल इंफेक्शन, दर्द से राहत दिलाने वाली कुछ क्रीम, कब्ज, दस्त और उल्टी की कुछ दवाएं हैं, जिनकी खरीद-बिक्री में फार्मासिस्ट या डॉक्टर की सलाह की जरूरत नहीं होती है।

इसके अलावा, थर्मामीटर, आक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर समेत कई उपकरणों में भी यह छूट हासिल है। औषधि एवं अंगराग अधिनियम, 1940 एवं संबंधित नियमावली के तहत पंचायतों में खोली जानेवाली दवा दुकानों को रेस्ट्रिक्टेड लाइसेंस दिया जाएगा।

लाभुक और स्थल चयन की जिम्मेदारी मुखिया और पंचायत सचिव की होगी, जिसपर प्रखंड विकास पदाधिकारी अनुमोदन प्रदान करेंगे। प्राप्त आवेदनों की अंतिम रूप से समीक्षा के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी और औषधि निरीक्षक संयुक्त अनुशंसा के साथ आवेदन उस क्षेत्र के अनुज्ञापन प्राधिकारी को स्वीकृति के लिए भेजेंगे।

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युवाओं को दिया जाएगा प्रशिक्षणदवा दुकानों के लिए लाइसेंस प्राप्त करनेवाले युवाओं को औषधि निरीक्षकों एवं चिकित्सकों की ओर से प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा कल्याण विभाग की ओर से मुख्यमंत्री रोजगार गारंटी कार्यक्रम के अंतर्गत इच्छुक लाइसेंसधारियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी बैंक से ऋण दिलवाने में भी सहायता प्रदान करेंगे।

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इंटरमीडिएट योग्यता अनिवार्य

दवा दुकान के लिए आवेदक की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता इंटरमीडिएट या उसके समकक्ष अनिवार्य की गई है। इसमें उच्च योग्यता वाले युवा को वरीयता दी जाएगी। साथ ही संबंधित गांव के स्थानीय निवासी और स्वयं के स्वामित्व वाली दुकान के आवेदक को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

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 लाइसेंस प्राप्तझारखंड फार्मासिस्ट एसोसिएशन, झारखंड के महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि ओवर द काउंटर (ओटीसी) श्रेणी में आनेवाली दवा टूथपेस्ट, कास्मेटिक समेत कई अन्य दवाओं की बिक्री के लिए फार्मासिस्ट की अनिवार्यता औषधि और अंगराग नियमावली में खत्म की गई है।

 करनेवाले युवाओं को हेल्पलाइन नंबर 104 के साथ समन्वय स्थापित करते हुए टेलीमेडिसिन और टेलीकंसल्टेशन की भी सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

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उन्होंने कहा कि पंचायतों में दवा दुकान खोलने की योजना अच्छी है, लेकिन बिना फार्मासिस्ट दवा बेचने की छूट का दुरुपयोग भी हो सकता है। इन दवाओं के साथ दवा दुकानदार अन्य दवा की बिक्री करने लगें तो उन्हें रोकना होगा। राज्य में हजारों फार्मासिस्ट बेरोजगार हैं। अच्छा होता इन्हें ही लाइसेंस देकर पंचायतों में दवा दुकान खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता।

 

 

 

 

 

 

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