गोड्डा लोकसभा की दावेदारी को लेकर आपसी कलह से हो सकता है कांग्रेस को नुकसान
गोड्डा लोकसभा की दावेदारी को लेकर आपसी कलह से हो सकता है कांग्रेस को नुकसान
-जब झारखंड में सत्ताधारी विधायक मलाईदार मंत्री पद के लिए कर रहें थे लड़ाई तब प्रदीप यादव लोगों की जान बचाने के लिए धूप में चला रहे थे साइकिल आपसी कलह की राजनिति में है सभी फसे
रिपोर्ट:- शाहीन खान
गोड्डा।
आपने प्रदीप यादव का नाम सुना है, हां सुना तो होगा ही आखिर झारखंड के कद्दावर नेता जो हैं, लेकिन क्या आपने इरफान अंसारी का नाम सुना है, हां वह भी सुना होगा क्योंकि झारखंड की राजनीति में वह भी अपना बहुत बड़ा मकाम रखते हैं.
मामला चाहे विपक्ष को खदेड़ने का हो या विपक्ष की नीतियों का विरोध करने का, इरफान अंसारी हमेशा अपने कटु शब्दों के लिए काफी जाने जाते हैं, फिलहाल उनकी लडाई सांसद निशिकांत दुबे से चल रही है, भले ही यह लड़ाई शब्दों के मार से ही क्यों ना शुरू हुई हो जिसमें इरफान अंसारी और सांसद निशिकांत दुबे एक दूसरे को राजनीतिक शब्दों से भरपूर प्रहार कर रहें है.
बीते दिनों गोड्डा में, गोड्डा रांची रेलवे परिचालन शुरू होने पर सांसद निशिकांत दुबे ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी वही इस कार्यक्रम में सांसद ने इरफान अंसारी के बयान पर यह कह दिया था कि हाथी चले बाजार तो कुत्ता भूंके हजार, इरफान अंसारी ने निशिकांत दुबे को देवघर एयरपोर्ट अप्रोच रोड के सिलापट के लिखे नाम मोदी अप्रोच रोड को लेकर कहा था कि मैं अभी भागलपुर जा रहा हूं और वहां निशिकांत दुबे के घर के बाहर वाली सड़क का उद्घाटन करूंगा और उस सड़क का नाम रख लूंगा हेमंत सोरेन सड़क,
इरफान अंसारी ने अपने बयान में यह भी कहा था कि वह गोड्डा टू रांची ट्रेन हरगिज़ नहीं चलने देंगे 15 से 16 घंटा रांची पहुंचने में लगता है। जबकि रांची गोड्डा से 5 से 6 घंटे में जाया जाता है। जिस पर सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कौन विधायक मैं नहीं जानता और अगर वह जामताड़ा का विधायक है तो गोड्डा में अपन दखलंदाजी क्यों दे रहा है.
लेकिन इस बात से हमें साफ तौर पर समझ में आ रहा है कि इरफान अंसारी 2024 में गोड्डा लोकसभा चुनाव में निशिकांत दुबे के खिलाफ लड़ने का मूड बनाए हुए हैं। लेकिन देखने वाली बात अब यह है कि इन सब में प्रदीप यादव को ना उगलते बन रहा है ना निगलते बन रहा है! संगठन को मजबूत बनाने के लिए कांग्रेस में आए प्रदीप यादव को पहले तो कांग्रेस कोई मजबूत पटल पर नहीं बैठा रही है जबकि प्रदीप यादव के कांग्रेस में आ जाने से डूबती हुई कांग्रेस को तिनके का सहारा जरूर मिला था.
सूत्रों की माने तो प्रदीप यादव भी गोड्डा लोकसभा सीट से सांसद के लिए लोकसभा का चुनाव लड़ने के मूड में नजर आ रहे हैं, लेकिन इरफान अंसारी इस बात को सार्वजनिक कर चुके हैं कि 2024 में वह गोड्डा लोक सभा सीट से चुनाव लड़ेंगे अब अगर प्रदीप यादव भी इसकी दावेदारी ठोकेंगे तो कहानी उल्टी पढ़ने लगेगी और कांग्रेस में आपसी कलह हो जाएगा। इसीलिए हमने कहा था कि प्रदीप यादव को ना उगलते बन रहा है और ना ही निगलते क्योंकि प्रदीप यादव पार्टी में कलह हरगिज़ नहीं चाहते है.
लेकिन बात वाजिब यहां पर है की निशिकांत दुबे को गोड्डा लोकसभा में अगर कोई पटकनिया दे सकता है तो वह है प्रदीप यादव,ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्यूंकि पूरे झारखंड में चर्चा आम है कि प्रदीप यादव इस राज्य में संगठन मजबूती के लिए जानें जाते है, जिस का नमूना आपने पिछले चुनाव में देखा होगा कि जे.भी.एम में इनके संगठनिक क्षमता के कारण नौ विधायक झारखंड विधानसभा से चुनकर गए थे, इनके नाम से ज्यादा इनका काम दिखता है.
अभी इन्होने कोरोना वैक्सीन के लिऐ जागरूकता साइकिल रैली भी निकाली थी और जब यह अपना पसीना बहा रहे थे वही सभी सत्ता धारी विधायक मंत्री पद के लिए लडाई कर रहें थे, इरफान अंसारी अपने ही पार्टी के स्वास्थ्य मंत्री को घेर रहे थे तब प्रदीप यादव जनता की भलाई के लिए सोच रहें थे, और कांग्रेस के संगठन को मजबूत कर रहें थे.
बता दे कि विधायक प्रदिप यादव ने 2019 के लोकसभा चुनाव में वर्तमान सांसद निशिकांत दुबे के विरोध में JVM से चुनाव लड़ा था। जिसमे निशिकांत दुबे ने उन्हें पछाड़ दिया था। आज देवघर में कांग्रेस के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के नेतृत्व में प्रदीप यादव के पुराने साथियों सह समर्थकों ने कांग्रेस का दामन थामा और कांग्रेस को मजबूत बनाने का निश्चय किया.
इस कार्यकर्म में इरफान अंसारी भी मौजुद थे, और प्रदीप यादव के समर्थकों ने सांसद की दावेदारी के लिए नारा लगाना शुरु किया, पर इरफान अंसारी के समर्थक भी कम थोड़े ही थे उन्होंने भी इरफान अंसारी के समर्थन में नारा लगाना शुरु कर दिया, जिसके बाद प्रदीप यादव ने अपने समर्थकों को काफी फटकार लगाई, लेकीन सूत्रों से ख़बर मिल रही है के इरफान अंसारी ने लोक सभा के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है, और पार्टी की राष्ट्रीय नेतृत्व से भी इस बारे में बात की है.
लेकीन ये बात भी तय है की, अगर लोकसभा चुनाव में प्रदीप यादव को कांग्रेस से टिकट नहीं मिलता है तो वो दिन दूर नही की जिस तरह CPM/CPI का सुफड़ा बंगाल से साफ हो गया है, उसी तरह झारखंड में भी कांग्रेस धूमिल हो जाएगी क्योंकि आपसी कलह की राजनिति ने ही बाबूलाल मरांडी को अर्श से फर्श तक पहुंचाया था और ये राजनीति झारखंड में नही चलने वाली है।