*दादी मां तुम बहुत याद आती है*

“दादी मां “

दादी मां तुम बहुत याद आती है,
जब कभी घर में कदम रखता हूं,
लगता मुझको बस यही है कि,
तुम मुझे पुकार की है ।।

दादी तुम बहुत याद आती है!

जब कभी पापा की डांट लगती,
या कभी मम्मी की मार पड़ती,
दौड़कर तुम ही तो बचाने आती,
आकर अपनी आगोश में मुझे छुपाती ।।

दादी तुम बरबस याद आती है !

तुम्हारे बगैर यह आंगन सूना लगता है,
खाली खाली घर का कोना लगता है,
तुम्हारी पुकार तेरा लाड और प्यार,
तेरे बिना क्यों सब बेगाना लगता है ।।

दादी दिल तुझे फिर से पाना चाहता है !

तुम्हारा जादुई स्पर्श और महत्त्व,
मेरे माथे को सुमना और गले लगाना,
सर के बालों पर अंगुलियां फेरना,
प्यार के गीतों को गुनगुनाना याद आता है ।।

दादी तुम्हें कोई हर पल याद करता है!

दादी मां तुम अब भी इस घर की शान हो,
हर एक के दिल में बसने वाली जान हो,
तेरी वजह से ही हम सब की पहचान है,
मेरे दिल में सबसे ऊपर तेरा ही तो नाम है ।।

दादी मां कैसे ना कहूं तू मेरी जान है !
                

                   Dr.Manoj Kr Rahi

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