काम की तलाश में भटक रहे प्रवासी मजदूर फोटो संख्या 6
काम की तलाश में भटक रहे प्रवासी मजदूर
फोटो संख्या 6
बसंतराय। संवाददाता
‘साहब पहले तो 42 दिनों तक भूखे रहे फिर नंगे पांव पैदल चलकर घर आया। यहां भी आने के बाद दो वक्त की रोटी की जुगाड़ में दर-दर की ठोकरें खा रहा हूं ।मनरेगा में काम नहीं मिल रहा है। साथ ही पूर्व में 16 दिन काम किए लेकिन उसका पैसा भी नहीं मिला है। ‘ यह कहना है बसंतराय प्रखंड के ग्राम पंचायत केवां के प्रवासी मजदूर मोहम्मद माजिद का। माजिद के अनुसार केवा में मनरेगा के तहत सुंदर डांड की खुदाई स्वीकृति दी गई थी। प्रारंभिक दौर में उक्त योजना में रोजगार सेवक द्वारा गांव के मजदूरों से कार्य नहीं कराया गया। बल्कि बगल के गांव के मजदूरों से काम शुरू कराया गया इसकी जानकारी जब मजदूरों को मिली तो सभी ने कार्य की मांग रोजगार सेवक से कि पर कुछ को बिचौलिया बताकर टाल दिया। मजदूर प्रखंड कार्यालय बसंतराय आकर बी डी ओ से मिले और मनरेगा में कार्य की मांग की । किसी तरह उन्हें काम मिला बीते 12 मई को यहां 17 मजदूरों ने मिट्टी की खुदाई शुरू की थी। इन 17 दिनों में किए कार्य का उन्हें मजदूरी भी नहीं दी गई है । मजदूरी नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है।
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हालात का बयान करते करते प्रवासी मजदूर मोहम्मद जमील,मोहम्मद शकीर, मोहम्मद नसीम आलम, आदि ने बताया कि नोएडा से गत माह गांव पहुंचे थे। मनरेगा से मजदूरी कर भरण-पोषण की उम्मीद बनाई थी। ले
लेकिन प्रथा ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दी। कार्य करने के बाद भी उन्हें मजदूरी नहीं मिल पाई मोहम्मद अरशद, शकूर आलम, रसूल, मोहम्मद निजाम, बशीरुद्दीन, शरीफ, आदि ने बताया कि रोजगार सेवक से जब अपने जॉब कार्ड के माध्यम से मजदूरी भुगतान की मांग की तो कहा गया अभी विलंभ होगा। साथ ही कार्यस्थल पर मजदूरों को मास्क भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
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