बलबड्डा: रक्षा काली की पूजा के मौके पर मुस्तैद रही चार थाना की पुलिस

बलबड्डा: रक्षा काली की पूजा के मौके पर मुस्तैद रही चार थाना की पुलिस

 

बलबड्डा: रक्षा काली की पूजा के मौके पर मुस्तैद रही चार थाना की पुलिस
– सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए संपन्न हुई पूजा
– प्रशासन के द्वारा निर्देशित सभी नियमों का किया गया पालन

 

मेहरमा से विजय कुमार की रिपोर्ट

मेहरमा ।

प्रखंड के बलबड्डा चौक के पास स्थापित रक्षा काली मंदिर में वार्षिक पूजा लॉक डाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुई। मौके पर प अंचलाधिकारी समेत चार थानों की पुलिस मुस्तैद थी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए काली मंदिर में पूजा पाठ विधिवत तरीके से संपन्न कराया गया। बताया जाता है कि पूजा के पूर्व सोमवार को स्थानीय ग्रामीणों ने मेहरमा अंचलाधिकारी खगेन महतो एवं बलबड्डा थाना प्रभारी दीपनारायण सिंह को एक आवेदन सौंपकर पारंपरिक तरीके से पूजा करने की अनुमति मांगी थी। पूजा समिति के आवेदन पर अंचलाधिकारी ने अपने वरीय पदाधिकारी को अवगत कराया था। जिला प्रशासन के निर्देश पर महागामा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी डॉ वीरेंद्र चौधरी, मेहरमा सीओ खगेन महतो, महागामा प्रभाग के पुलिस निरीक्षक पंकज कुमार झा, मेहरमा प्रभाग के पुलिस निरीक्षक आरके तिवारी, ठाकुरगंगटी थाना के एएसआई फुलेश्वर सिंह, बलबड्डा थाना प्रभारी दीपनारायण सिंह एवं गोड्डा पुलिस लाइन से पहुंची दर्जनों महिला पुलिस बल के साथ बलबड्डा चौक पहुंचे ‌। लाॅक डाउन की स्थिति मे सामूहिक रूप से भीड़ इकट्ठा न हो इसके लिए प्रशासन की मौजूदगी में मंदिर पर रक्षा काली की पूजा सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए करायी गई।

पूजा के दौरान तीन चार व्यक्ति से अधिक व्यक्ति को पूजा करने की अनुमति नही दी गई थी। ग्रामीणों ने भी लाॅक डाउन का पूरी तरह पालन करते हुए प्रशासन की बात मान अपनी भक्ति को भी पूरा किया।
बताया जाता है कि बलबड्डा काली मंदिर एक ऐतिहासिक मंदिर है। इस मंदिर में हर वर्ष जेठ माह के अंतिम सप्ताह में रक्षा काली की पूजा अर्चना कर बकरा की बलि देने की परम्परा चली आ रही है। लेकिन इस वर्ष कोरोना वायरस जैसे वैश्विक महामारी को देखते हुए हिन्दू धर्म गुरू ने सिर्फ लाॅक डाउन एवं सोशल डिस्टेंस का पालन कर अपनी पूजा भक्ति में माहौल में संपन्न कराया गया।

 

इधर भक्तों का मानना है कि मां काली शक्ति सम्प्रदाय की सबसे प्रमुख देवी हैं।जिस तरह संहार के अधिपति शिव जी हैं ,उसी प्रकार संहार की अधिष्ठात्री देवी मां काली हैं। शक्ति के कई स्वरूप हैं। शुम्भ-निशुम्भ के वध के समय मां के शरीर से एक तेज पुंज बाहर निकल गया था। फलस्वरूप उनका रंग काला पड़ गया और तभी से उनको काली कहा जाने लगा।

इनकी पूजा उपासना से भय नाश ,आरोग्य की प्राप्ति, स्वयं की रक्षा और शत्रुओं का नियंत्रण होता है। इनकी उपासना से तंत्र मंत्र के सारे असर समाप्त हो जाते हैं। मां काली की पूजा का उपयुक्त समय रात्रि काल होता है। पाप ग्रहों, विशेषकर राहु और केतु शनि की शांति के लिए मां काली की उपासना अचूक होती है।

– सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए संपन्न हुई पूजा
– प्रशासन के द्वारा निर्देशित सभी नियमों का किया गया पालन

मेहरमा से विजय कुमार की रिपोर्ट
मेहरमा ।
प्रखंड के बलबड्डा चौक के पास स्थापित रक्षा काली मंदिर में वार्षिक पूजा लॉक डाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुई। मौके पर प अंचलाधिकारी समेत चार थानों की पुलिस मुस्तैद थी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए काली मंदिर में पूजा पाठ विधिवत तरीके से संपन्न कराया गया। बताया जाता है कि पूजा के पूर्व सोमवार को स्थानीय ग्रामीणों ने मेहरमा अंचलाधिकारी खगेन महतो एवं बलबड्डा थाना प्रभारी दीपनारायण सिंह को एक आवेदन सौंपकर पारंपरिक तरीके से पूजा करने की अनुमति मांगी थी। पूजा समिति के आवेदन पर अंचलाधिकारी ने अपने वरीय पदाधिकारी को अवगत कराया था। जिला प्रशासन के निर्देश पर महागामा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी डॉ वीरेंद्र चौधरी, मेहरमा सीओ खगेन महतो, महागामा प्रभाग के पुलिस निरीक्षक पंकज कुमार झा, मेहरमा प्रभाग के पुलिस निरीक्षक आरके तिवारी, ठाकुरगंगटी थाना के एएसआई फुलेश्वर सिंह, बलबड्डा थाना प्रभारी दीपनारायण सिंह एवं गोड्डा पुलिस लाइन से पहुंची दर्जनों महिला पुलिस बल के साथ बलबड्डा चौक पहुंचे ‌। लाॅक डाउन की स्थिति मे सामूहिक रूप से भीड़ इकट्ठा न हो इसके लिए प्रशासन की मौजूदगी में मंदिर पर रक्षा काली की पूजा सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए करायी गई।
पूजा के दौरान तीन चार व्यक्ति से अधिक व्यक्ति को पूजा करने की अनुमति नही दी गई थी। ग्रामीणों ने भी लाॅक डाउन का पूरी तरह पालन करते हुए प्रशासन की बात मान अपनी भक्ति को भी पूरा किया।
बताया जाता है कि बलबड्डा काली मंदिर एक ऐतिहासिक मंदिर है। इस मंदिर में हर वर्ष जेठ माह के अंतिम सप्ताह में रक्षा काली की पूजा अर्चना कर बकरा की बलि देने की परम्परा चली आ रही है। लेकिन इस वर्ष कोरोना वायरस जैसे वैश्विक महामारी को देखते हुए हिन्दू धर्म गुरू ने सिर्फ लाॅक डाउन एवं सोशल डिस्टेंस का पालन कर अपनी पूजा भक्ति में माहौल में संपन्न कराया गया।

इधर भक्तों का मानना है कि मां काली शक्ति सम्प्रदाय की सबसे प्रमुख देवी हैं।जिस तरह संहार के अधिपति शिव जी हैं ,उसी प्रकार संहार की अधिष्ठात्री देवी मां काली हैं। शक्ति के कई स्वरूप हैं। शुम्भ-निशुम्भ के वध के समय मां के शरीर से एक तेज पुंज बाहर निकल गया था। फलस्वरूप उनका रंग काला पड़ गया और तभी से उनको काली कहा जाने लगा।

इनकी पूजा उपासना से भय नाश ,आरोग्य की प्राप्ति, स्वयं की रक्षा और शत्रुओं का नियंत्रण होता है। इनकी उपासना से तंत्र मंत्र के सारे असर समाप्त हो जाते हैं। मां काली की पूजा का उपयुक्त समय रात्रि काल होता है। पाप ग्रहों, विशेषकर राहु और केतु शनि की शांति के लिए मां काली की उपासना अचूक होती है।

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