इस बार अलग तरह से मनेगी ईद -अपने घरों में ही लोग ईद की नमाज अदा करेंगे -गले मिलने से परहेज करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे
इस बार अलग तरह से मनेगी ईद
-अपने घरों में ही लोग ईद की नमाज अदा करेंगे
-गले मिलने से परहेज करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे
जावेद अख्तर /विजय कुमार की रिपोर्ट
Godda News Update
हनवारा/ मेहरमा।
देश में लॉकडाउन के कारण आम लोगों से लेकर शासन एवं प्रशासन तक कोरोना महामारी के कारण परेशान हो रहे हैं। इसी को देखते हुए देश में लॉक डाउन 4 लागू हो गया है। इसके कारण अबकी बार ईद लोग अलग तरीके से मनाएंगे। लोग अपने अपने घरों में ईद की नमाज अदा करेंगे।इमारते सरिया से भी मुस्लिम समुदाय के लोगो से अपील की गई है कि कोरोना महामारी के कारण सभी लोग अपने घर में ईद की नमाज अदा करें।
रमजान का पाक महीना खत्म होने के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है। मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए ईद पर्व बेहद ही खास होता है।रमजान के पूरे महीने मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रमजान के 10 वें शव्वाल की पहली तारीख को ईद होती है, जो इस साल 25 मई को मनाई जाएगी। 24 मई को चांद का दीदार हो गया। ईद उल फितर की सही तारीख चांद के दिखने पर ही तय की जाती है। इसका समय अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर मनाई जाती है।
इस्लामिक कैलेंडर की मानें तो यह चांद पर निर्भर होता है, जो 29 या 30 दिन का होता है। चांद के दिखने से नए महीने की शुरुआत होती है। बता दें कि सऊदी अरब, यूएई और कई खाड़ी देशों में 24 मई को ईद मनाया गया, इसलिए इन देशों में 25 मई को ईद नहीं मनाई जाएगी।
वहां इस बार 30 दिन के रोजे के बाद ईद रविवार के दिन मनाई गई है।
भारत में भी ईद के चांद का दीदार रविवार को करने के लिए लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। ईद उल फितर को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मीठे पकवान बनाए जाते हैं।
खासतौर पर इस दिन सेवई बनती है।इसके बाद लोग इस खास पर्व पर एक दूसरे से गले मिलकर अपने गिले शिकवे दूर करते हैं। इस दिन नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हुए अमन और चैन की दुआ मांगी जाती है।
इस दिन खुदा का शुक्रिया अदा किया जाता है और जरूरतमंदों के लिए रकम दान की जाती है, जिसे जकात कहते हैं।
जानें क्यों मनाई जाती है ईद:
मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पवित्र शहर मदीना में ईद-उल-फितर का उत्सव शुरू हुआ । माना जाता है कि इस दिन पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई जीती थी। इस जीत की खुशी में सबका मुंह मीठा करवाया गया, इसी कारण इस दिन को मीठी ईद या ईद उल फितर के रूप में मनाया जाता है।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार हिजरी संवत 2 यानी 624 ई में पहली बार ईद-उल-फितर मनाया गया था।
घर में रहकर मनाएंगे ईद
कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते देशभर में धार्मिक स्थलों को बंद रखने का आदेश है। इस बीच ईद-उल-फितर को ध्यान में रखते हुए गोड्डा जिला के अधिकांश मस्जिदों के इमामों ने भी मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की है कि वो घर पर रहकर ही नमाज पढ़ें और शांतिपूर्ण तरीके से ईद मनाएं।
रविवार को चांद देखा गया। सोमवार को सभी लोग ईद मनाएंगे। साथ ही मस्जिद के इमामों और मौलवियों ने कहा है कि लॉकडाउन के नियमों का सभी पालन करेंगे। इसी में खुद की और सबकी भलाई है।
मेहरमा इलाके के लोगों ने बयान जारी कर बताया है कि वे लोग लॉकडाउन 4.0 के बीच सभी दिशा-निर्देशों और मानदंडों को ध्यान में रखते हुए ईद-उल-फितर मनाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरोनो वायरस से खुद को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है।
हम सभी दिशानिर्देशों का पालन करेंगे और घर पर प्रार्थना करेंगे।पुलिस ने लॉकडाउन के नियमों का पालन करने की अपील
दूसरी तरफ लॉकडाउन के बीच ईद-उल-फितर का त्योहार शांतिपूर्ण मनाने के लिए शनिवार को मेहरमा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी गांवो के लोगों से शांतिपूर्ण त्यौहार मनाने की अपील किया है। साथ ही लॉकडाउन के नियमों का पालन कर ईद मनाने की अपील की।
अधिकारियों के सुझाव का समर्थन करते हुए मौलवियों ने भी लोगों से घर में रहकर की ईद मनाने की अपील किया है।एहतियात के तौर पर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न इलाके में ईद के त्योहार को देखते हुए भारी पुलिस बल के साथ फ्लैग मार्च निकाला गया।