नव संवत्सर से कम हो जाएगा कोरोना का प्रभाव: पंडित नितेश मिश्रा

नव संवत्सर से कम हो जाएगा कोरोना का प्रभाव: पंडित नितेश मिश्रा

-कहा,10 हजार वर्ष पूर्व नारद संहिता में की गई थी कोरोना की भविष्यवाणी
गोड्डा से अभय पलिवार की रिपोर्ट

गोड्डा
वर्तमान में पूरे विश्व को भयभीत करने वाली कोरोना महामारी की भविष्यवाणी आज से लगभग 10 हजार वर्ष पूर्व नारद संहिता में कर दी गई थी।
यह भी उसी समय बता दिया गया था कि यह महामारी किस दिशा से फैलेगी। पंडित नितेश कुमार मिश्रा ने बताया कि नारद संहिता के एक श्लोक में वर्णन आया है कि-
भूपाव हो महारोगो मध्य स्यार्धवृष्ट य। दुखिनो जंत्व सर्वे वत्स रे परी धाविनी।।
अर्थात परिधावी नामक संवत्सर में राजाओं में परस्पर युद्ध होगा और महामारी फैलेगी, बारिश असामान्य होगी व सभी प्राणी दुखी होंगे। इस महामारी का प्रारम्भ 2019 के अंत में पड़ने वाले सूर्यग्रहण से होगा ।
पंडित मिश्रा ने बताया कि बृहत संहिता में वर्णन आया है कि-
शनिश्चर भूमिप्तो स्कृद रोगे प्रीपिडिते जनाः।।
अर्थात जिस वर्ष के राजा शनि होते हैं उस वर्ष में महामारी फैलती है । विशिष्ट संहिता में वर्णन प्राप्त हुआ कि जिस दिन इस रोग का प्रारम्भ होगा, उस दिन पूर्वा भाद्र नक्षत्र होगा। यह सत्य है कि 26 दिसंबर 2019 को पूर्वाभाद्र नक्षत्र था । उसी दिन से महामारी का प्रारंभ हो गया था। क्योंकि चीन से इसी समय यह महामारी फैली, जिसका कि पूर्व दिशा से फैलने का संकेत नारद संहिता में दे रखा था ।

महामारीका अंत:
पंडित नितेश मिश्रा ने बताया कि वशिष्ठ संहिता के अनुसार, इस महामारी का प्रभाव 3 से 7 महीने तक रहेगा । परंतु नव संवत्सर के प्रारम्भ से इसका प्रभाव कम होना शुरू हो जाएगा । अर्थात भारतीय नव संवत्सर, जिसका नाम प्रमादी संवत्सर है, जो कि 25 मार्च से प्रारंभ हो रहा है , इसी दिन से कोरोना का प्रभाव कम होना प्रारम्भ हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि हमारे धर्मशास्त्रों में सृष्टि के प्रारम्भ से लेकर अंत तक की प्रत्येक भविष्यवाणी की गई है। परन्तु हम भारतीय आज भी पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण कर रहे हैं । उन्होंने लोगों से पुनः अपनी संस्कृति में लौटने की अपील की ।

*समाचार आज तक*

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